फरीदाबाद विस्फोटक मामला: अल-फलाह यूनिवर्सिटी में पुलिस छापा, डॉक्टरों से आतंकी साजिश तक — सामने आ रहा है ‘व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल’ का चेहरा
फरीदाबाद में बरामद 2900 किलोग्राम विस्फोटक ने पूरे उत्तर भारत की सुरक्षा एजेंसियों को हिला कर रख दिया है। मंगलवार को इस मामले में पुलिस ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी में बड़ा छापा मारा। सूत्रों के अनुसार, यहां से 13 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें 7 डॉक्टर, 5 छात्र और एक युवती शामिल है। यह मामला अब दिल्ली ब्लास्ट से भी जुड़ता दिखाई दे रहा है।
अल-फलाह यूनिवर्सिटी बनी जांच का केंद्र
दिल्ली ब्लास्ट का आरोपी डॉ. मोहम्मद उमर नबी भी इसी यूनिवर्सिटी में पढ़ाता था। वह 7 मई 2024 को यहां बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त हुआ था, लेकिन 30 अक्टूबर के बाद से गायब हो गया था।
जांच में सामने आया कि 10 नवंबर को ब्लास्ट वाले दिन वह इसी यूनिवर्सिटी से i20 कार लेकर निकला था, जो बाद में लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास ब्लास्ट में इस्तेमाल हुई।
यह कड़ी दिल्ली धमाके और फरीदाबाद विस्फोटक बरामदगी को एक ही नेटवर्क की तरफ इशारा करती है।
धौज और फतेहपुर तगा से मिला विस्फोटक जखीरा
9 नवंबर को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने फरीदाबाद के धौज और फतेहपुर तगा गांव में स्थित डॉ. मुजम्मिल शकील के किराए के दो घरों से भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री जब्त की थी।
इस बरामदगी के बाद CID और NIA की टीमें जांच में जुटी हैं।
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धौज गांव के घर से उर्दू में लिखे कुछ शब्द मिले, जिनका वीडियो बनाकर जांच एजेंसियों को भेजा गया है।
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फतेहपुर तगा गांव में मुजम्मिल का ठिकाना बेहद एकांत में था — आखिरी छोर पर बना मकान, जिसके आस-पास कोई नहीं रहता। स्थानीय लोग भी उसे पहचान नहीं पाए।
वॉट्सएप चैट डिलीट, 4 जमाती हिरासत में
जांच के दौरान पुलिस ने 4 जमातियों को हिरासत में लिया, जिनके फोन से वॉट्सएप चैट डिलीट मिली। ये चारों अलग-अलग राज्यों से हैं —
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एक जम्मू-कश्मीर से,
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एक तमिलनाडु से,
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एक ओडिशा से,
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और एक हरियाणा के हथीन (पलवल) से।
पुलिस का कहना है कि चैट डिलीट किए जाने के कारण शक और गहरा गया है, और इनसे पूछताछ जारी है।
तीन डॉक्टर गिरफ्तार
फरीदाबाद पुलिस ने इस केस में अब तक तीन डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है —
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डॉ. आदिल अहमद राठर
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डॉ. मुजम्मिल अहमद गनई उर्फ मुजम्मिल शकील
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डॉ. शाहीन शाहिद (जो जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग ‘जमात-उल-मोमीनात’ से जुड़ी बताई जा रही है)
इन तीनों के तार अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े हैं।
‘व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल’ की साजिश
जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह पूरा नेटवर्क एक ‘व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल’ का हिस्सा है — यानी ऐसे लोग जो समाज में पढ़े-लिखे, प्रतिष्ठित और भरोसेमंद चेहरे रखते हैं, लेकिन पर्दे के पीछे आतंकी संगठनों के लिए काम कर रहे हैं।
इस बार डॉक्टरों और शिक्षाविदों का इस्तेमाल विस्फोटक सामग्री के भंडारण और लॉजिस्टिक सपोर्ट के लिए किया जा रहा था।
गल्फ फंडिंग पर उठे सवाल
जांच में यह भी सामने आया है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी की स्थापना में गल्फ देशों से फंडिंग आई थी। हालांकि, अभी तक यूनिवर्सिटी प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है।
NIA और ED अब इस दिशा में भी जांच कर रही हैं कि कहीं यह फंडिंग आतंकी संगठनों से जुड़े खातों के माध्यम से तो नहीं आई।
सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
इस घटना के बाद दिल्ली-NCR, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश में अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
NIA, ATS और इंटेलिजेंस ब्यूरो अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि इस नेटवर्क का ‘कमांड सेंटर’ कहां था और क्या देश के अन्य राज्यों में भी इसके मॉड्यूल सक्रिय हैं।
