हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सरकारी ड्यूटी पर हमला करने वाले मामलों में समझौता नहीं चलेगा — झज्जर के सरपंच की याचिका खारिज

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सरकारी ड्यूटी पर हमला करने वाले मामलों में समझौता नहीं चलेगा — झज्जर के सरपंच की याचिका खारिज

हरियाणा के झज्जर जिले से जुड़े एक मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है।
कोर्ट ने साफ कहा कि —

“जब कोई अपराध सरकारी कर्तव्यों का पालन कर रहे लोक सेवक के खिलाफ किया जाता है, तो उसका निजी समझौते से निपटारा नहीं किया जा सकता।”

यह फैसला झज्जर के बिशन गांव के सरपंच इंद्रजीत सुहाग और उनके बेटे अक्षय सुहाग की याचिका को खारिज करते हुए सुनाया गया।
दोनों ने बिजली विभाग के अधिकारियों पर हमला करने के मामले में दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग की थी।


 मामला क्या था

एफआईआर के अनुसार, 27 अगस्त 2024 की रात करीब 11:40 बजे,
बिजली विभाग के कर्मचारी लाइनमैन राकेश, सुनील और मोहित
बेरी स्थित जाट धर्मशाला में बने शिकायत केंद्र लौट रहे थे।

जब वे अंदर जाने लगे, तो कुछ लोगों ने उन्हें रोक दिया और कहा कि
धर्मशाला उन्होंने बुक कर रखी है।
बिजली कर्मचारियों ने बताया कि यह जगह सरकारी शिकायत केंद्र है।

विवाद बढ़ा तो गांव के सरपंच इंद्रजीत सुहाग और उनका बेटा अक्षय मौके पर पहुंच गए।
आरोप है कि उन्होंने कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की,
साथ ही जूनियर इंजीनियर से संपर्क करने वाला सरकारी फोन तोड़ दिया।


 याचिका में क्या कहा गया

सरपंच इंद्रजीत और उनके बेटे ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की,
जिसमें कहा गया कि यह घटना गलतफहमी के कारण हुई थी और
अब दोनों पक्षों में समझौता हो चुका है।

उन्होंने 7 अगस्त 2025 के समझौता विलेख का हवाला देते हुए
एफआईआर रद्द करने की मांग की।
वकील ने यह भी बताया कि मजिस्ट्रेट कोर्ट की रिपोर्ट (19 सितंबर) के अनुसार
दोनों पक्षों ने समझौते की बात दोहराई है।


 हाईकोर्ट ने क्या कहा

जस्टिस सुमित गोयल की एकल पीठ ने यह तर्क खारिज कर दिया।
उन्होंने कहा —

“जब कोई अपराध लोक सेवक के खिलाफ उनके आधिकारिक कर्तव्य के दौरान किया जाता है,
तो यह निजी विवाद नहीं बल्कि सार्वजनिक हित से जुड़ा मामला होता है।”

कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में
सरकारी अनुमति के बिना समझौता या कार्यवाही वापसी मान्य नहीं होगी।


 प्रशासनिक जांच के आदेश

हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले में
बिजली विभाग के प्रशासनिक सचिव को भी जांच के आदेश दिए हैं।
निर्देश दिया गया कि यह पता लगाया जाए कि
शिकायतकर्ता-कर्मचारियों ने “बिना प्रशासनिक अनुमति के समझौता” कैसे किया।
कोर्ट ने कहा कि यदि गलती पाई जाए तो विभागीय कार्रवाई की जाए।


 फैसला क्यों अहम है

यह निर्णय उन सभी मामलों के लिए मिसाल बनेगा,
जहां सरकारी अधिकारी या कर्मचारी अपनी ड्यूटी निभाते समय हमले या बाधा का सामना करते हैं।
अब ऐसे मामलों में
निजी समझौते के नाम पर एफआईआर रद्द नहीं की जा सकेगी।

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