मलयालम फिल्म इंडस्ट्री का सबसे बड़ा केस: 9 साल बाद एक्टर दिलीप बरी, लेकिन मुख्य आरोपी दोषी
मलयालम फिल्म इंडस्ट्री की एक्ट्रेस देवकी (बदला हुआ नाम) से जुड़े 2017 के हाई-प्रोफाइल अपहरण और हमले के मामले में बड़ा फैसला आया है।
9 साल बाद केरल के एर्नाकुलम सेशन कोर्ट ने एक्टर दिलीप को सभी आरोपों से बरी कर दिया है, जबकि मुख्य आरोपी ‘पल्सर सुनी’ सहित छह लोगों को दोषी ठहराया गया है।
12 दिसंबर को दोषी पाए गए आरोपियों की सजा का ऐलान होगा।
कहानी की शुरुआत: 17 फरवरी 2017 की घटना
एक्ट्रेस देवकी ने फरवरी 2017 में पुलिस को शिकायत दी थी कि रात के समय कोचीन जाते हुए उनकी कार को कुछ लोगों ने रोककर जबरदस्ती अंदर प्रवेश किया।
चलती गाड़ी में उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया और पूरी घटना को रिकॉर्ड किया गया। बाद में उन्हें एक डायरेक्टर के घर छोड़ दिया गया, जहां से मामला आगे बढ़ा।
इस मामले में इंडस्ट्री का एक बड़ा नाम — एक्टर दिलीप — साजिश के आरोप में घिरा।
कैसे पहुंचे दिलीप शक के घेरे में?
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देवकी की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच में कार चालक और अन्य शामिल लोगों की गिरफ्तारी हुई।
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कुछ आरोपियों के बयान और देवकी के निकट संबंधों के कारण दिलीप का नाम सामने आया।
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दिलीप की पूर्व पत्नी मंजू वारियर की गवाही ने केस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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पुलिस का आरोप था कि दिलीप को आशंका थी कि देवकी ने उनके निजी जीवन से जुड़े कुछ विवादों की जानकारी बाहर पहुंचाई थी।
हालांकि बाद में कई गवाह कोर्ट में अपने बयान बदलते चले गए।
गिरफ्तारी, बेल और लंबा ट्रायल
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10 जुलाई 2017 को दिलीप गिरफ्तार हुए।
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दो महीने बाद उन्हें जमानत मिल गई।
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केस का ट्रायल 2020 में शुरू हुआ और करीब 261 गवाहों ने गवाही दी।
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कोर्ट में 100+ दिनों तक बहस चली।
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834 डॉक्यूमेंट्स पेश किए गए।
इस दौरान दो प्रमुख गवाह—पूर्व विधायक पी.टी. थॉमस और निर्देशक बालचंद्र—का निधन भी हुआ।
दोषी कौन और बरी कौन?
दोषी ठहराए गए (मुख्य आरोपी):
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‘पल्सर सुनी’ सहित 6 लोग
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आरोप: आपराधिक साजिश, अपहरण, हमला
बरी किया गया:
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एक्टर दिलीप
कोर्ट ने कहा कि उनके खिलाफ पर्याप्त और विश्वसनीय सबूत नहीं मिले।
दिलीप की प्रतिक्रिया
फैसले के बाद दिलीप ने कहा:
“मेरे खिलाफ 9 साल तक चल रही साजिश बेनकाब हो गई है।”
उन्होंने दावा किया कि कुछ लोगों ने मिलकर उनके खिलाफ कहानी गढ़ी और मीडिया में फैलाया।
WCC और मलयालम इंडस्ट्री में #MeToo की शुरुआत
इस घटना के बाद इंडस्ट्री में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बड़ा आंदोलन खड़ा हुआ—
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2017 में हेमा कमेटी बनी
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2020 में WCC (Women in Cinema Collective) की शुरुआत
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कई कलाकारों ने इंडस्ट्री में होने वाले उत्पीड़न के मामलों पर खुलकर बात की
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2024 में हेमा कमेटी की रिपोर्ट में 30 महिलाओं ने अपने अनुभव दर्ज कराए
इस केस ने मलयालम इंडस्ट्री में लंबे समय से दबे मुद्दों को सामने ला दिया।
9 साल बाद न्याय की राह कहां पहुंची?
9 वर्षों तक चली जांच, सुनवाई और विवादों के बाद—
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मुख्य अपराधी दोषी पाए गए
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दिलीप को आरोपों से राहत मिली
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इंडस्ट्री में सुरक्षा और पारदर्शिता की बहस और तेज हुई
अब सबकी नजरें 12 दिसंबर को होने वाले सजा के ऐलान पर हैं।
