दिल्ली में फिर दहशत का मंजर: दिनदहाड़े कॉलेज स्टूडेंट पर एसिड अटैक, सवालों के घेरे में महिलाओं की सुरक्षा
राजधानी दिल्ली में एक बार फिर महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रविवार को नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली के लक्ष्मीबाई कॉलेज के पास दिल्ली यूनिवर्सिटी की दूसरी वर्ष की छात्रा पर तीन बदमाशों ने एसिड अटैक कर दिया। घटना के बाद लड़की के दोनों हाथ बुरी तरह झुलस गए और उसे तुरंत दीपचंद बंधु अस्पताल में भर्ती करवाया गया।
कैसे हुआ हमला?
पुलिस के मुताबिक, मुकुंदपुर निवासी जितेंद्र नाम का युवक अपने दो साथियों अरमान और ईशान के साथ बाइक पर पहुंचा था। ईशान ने बोतल में भरा तेजाब अरमान को दिया, जिसने छात्रा पर फेंक दिया। छात्रा ने जब अपना चेहरा बचाने के लिए हाथ आगे किए, तो दोनों हाथ गंभीर रूप से झुलस गए।
आरोपी और पुरानी रंजिश
पीड़िता के बयान में सामने आया कि आरोपी जितेंद्र पहले से उसका पीछा करता था। करीब एक महीने पहले दोनों के बीच किसी बात को लेकर बहस और विवाद हुआ था। इसके बाद से ही वह उसे परेशान कर रहा था।
पुलिस जांच और मामला दर्ज
दिल्ली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 124 के तहत मामला दर्ज किया है। फिलहाल तीनों आरोपी गिरफ्त से बाहर हैं। पुलिस की कई टीमें उनकी तलाश में छापेमारी कर रही हैं।
कानून क्या कहता है?
BNS की धारा 124 (1) के अनुसार—
यदि कोई व्यक्ति किसी के शरीर पर तेजाब फेंककर स्थायी या आंशिक नुकसान पहुंचाता है, तो उसे कम से कम 10 साल की सजा या आजीवन कारावास हो सकता है, साथ ही जुर्माना भी देना होगा।
धारा 124 (2) के तहत—
यदि कोई व्यक्ति एसिड फेंकने या देने का प्रयास करता है, तो उसे कम से कम 5 साल की सजा और अधिकतम 7 साल तक की जेल हो सकती है।
कितना देना होता है जुर्माना?
इस धारा में जुर्माने की राशि तय नहीं है, पर अपराधी को इतनी रकम देनी होती है जिससे पीड़िता के इलाज और पुनर्वास का खर्च पूरा हो सके।
दिल्ली में बढ़ रहे हैं एसिड अटैक
राष्ट्रीय राजधानी में एसिड अटैक के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। कुछ हालिया घटनाएं:
- पांडव नगर (अगस्त 2025) – पति ने पत्नी पर तेजाब फेंका।
- शास्त्री पार्क (जनवरी 2024) – 16 वर्षीय लड़के ने नाबालिग लड़की पर एसिड फेंका।
- आनंद पर्वत (दिसंबर 2023) – पड़ोसी ने 17 वर्षीय लड़की पर तेजाब फेंका।
समाज और सरकार के लिए बड़ा सबक
यह घटनाएं बताती हैं कि महिला सुरक्षा के कानून कड़े हैं, लेकिन उनका डर अपराधियों में नहीं है। ज़रूरत है कि ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई, फास्ट-ट्रैक ट्रायल, और पीड़ितों के पुनर्वास के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
