हरियाणा: पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष चौधरी उदयभान ने ईवीएम और वीवीपैट जांच हाईकोर्ट की निगरानी में कराने की मांग की
हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर चुनावी ईवीएम (EVM) और वीवीपैट (VVPAT) को लेकर विवाद छिड़ गया है।
हरियाणा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और होडल विधानसभा सीट से प्रत्याशी रहे चौधरी उदयभान ने अपनी चुनाव याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट से मांग की है कि चुनाव में इस्तेमाल हुई ईवीएम और वीवीपैट मशीनों की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया अदालत के रजिस्ट्रार की निगरानी में कराई जाए।
चुनाव याचिका में उठाए गंभीर सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान याची के वकील, पूर्व एडवोकेट जनरल मोहन जैन, ने अदालत को बताया कि
बैलेट यूनिट, कंट्रोल यूनिट और वीवीपैट मशीनों की मेमोरी और माइक्रो-कंट्रोलर की जांच के लिए ₹2.36 लाख की राशि पहले ही जमा कराई जा चुकी है।
वकील ने तर्क दिया कि जन प्रतिनिधित्व कानून, हाईकोर्ट नियम और सुप्रीम कोर्ट के फैसले यह स्पष्ट करते हैं कि चुनाव याचिकाओं का निपटारा छह माह के भीतर होना चाहिए।
जिला चुनाव अधिकारी पर दबाव की आशंका
मोहन जैन ने अदालत से आग्रह किया कि
ईवीएम की जांच हाईकोर्ट की निगरानी में की जाए, क्योंकि सत्ताधारी दल से जुड़े होने के कारण जिला चुनाव अधिकारी पर राजनीतिक दबाव पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने पानीपत जिले के एक सरपंच चुनाव मामले में अदालत की निगरानी में वोटों की पुनर्गणना कराई थी, जिससे नतीजे बदल गए थे।
इसी आधार पर उन्होंने सुझाव दिया कि अदालत में कुछ ईवीएम पर ट्रायल वोट डालकर यह देखा जाए कि वोट वास्तव में किस पक्ष में दर्ज होता है।
चुनाव आयोग को नोटिस जारी
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को पक्षकार बनाए जाने संबंधी आवेदन पर नोटिस जारी किया और जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
हालांकि, प्रतिवादी पक्ष की ओर से अब तक कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया है।
हाईकोर्ट के जस्टिस सुवीर सहगल ने चुनाव आयोग और अन्य प्रतिवादियों को 16 जनवरी तक जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है और सुनवाई को स्थगित कर दिया है।
भाजपा विधायक की जीत को दी चुनौती
उदयभान ने होडल विधानसभा सीट से हुए चुनाव में भाजपा उम्मीदवार हरिंदर सिंह की जीत को पहले ही अदालत में चुनौती दी हुई है।
उनका आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया में तकनीकी अनियमितताएं और मशीनों की गड़बड़ी ने नतीजों को प्रभावित किया है।
क्या हो सकता है अगला कदम?
अगर हाईकोर्ट जांच को अपनी निगरानी में करवाने की अनुमति देता है, तो यह मामला हरियाणा की राजनीति में एक मिसाल बन सकता है — ठीक वैसे ही जैसे पानीपत के सरपंच चुनाव मामले में हुआ था।
यह निर्णय आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में ईवीएम की पारदर्शिता को लेकर चल रही बहस को और भी तीखा कर सकता है।
स्थान: हाईकोर्ट, चंडीगढ़
याची: चौधरी उदयभान (पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस)
प्रतिवादी: हरिंदर सिंह (भाजपा विधायक, होडल)
अगली सुनवाई की तिथि: 16 जनवरी 2026
