हरियाणा की सियासत में बड़ा झटका: पूर्व मंत्री संपत सिंह ने कांग्रेस से दिया इस्तीफा, पत्र में खोली पार्टी की अंदरूनी कलह
हरियाणा की राजनीति में रविवार को बड़ा धमाका हुआ जब पूर्व मंत्री संपत सिंह ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना त्यागपत्र कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा और उसकी कॉपी राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल, बीके हरिप्रसाद, और राव नरेंद्र सिंह को भी भेजी।
संपत सिंह ने अपने इस्तीफे में कांग्रेस नेतृत्व पर तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि अब उन्हें विश्वास नहीं रहा कि पार्टी हरियाणा की जनता के हितों का प्रतिनिधित्व कर सकती है।
इस्तीफे में क्या लिखा संपत सिंह ने?
“मैं एक गर्वित हरियाणवी हूं, और अपने प्रदेश की जनता को निराश नहीं कर सकता।
वर्तमान कांग्रेस नेतृत्व में मेरा विश्वास समाप्त हो गया है। अतः, मैं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से अपना त्यागपत्र देने के लिए विवश हूं।”
संपत सिंह का राजनीतिक सफर: शिक्षक से नेता तक
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| नाम | संपत सिंह |
| राजनीतिक शुरुआत | ताऊ देवीलाल के साथ इनेलो से |
| कांग्रेस में शामिल होने का वर्ष | 2009 |
| विधानसभा कार्यकाल | 6 बार निर्वाचित |
| मंत्री पद | दो बार कैबिनेट मंत्री |
| नेता प्रतिपक्ष | एक कार्यकाल तक |
| शैक्षणिक पृष्ठभूमि | राजनीति विज्ञान के सहायक प्राध्यापक |
इस्तीफे के प्रमुख कारण
टिकट और क्षेत्र परिवर्तन से असंतोष
संपत सिंह ने बताया कि उन्हें फतेहाबाद से टिकट देने का वादा किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें नलवा से चुनाव लड़ने को कहा गया।
इसके बावजूद वे नलवा से जीते, परंतु मंत्री पद या संगठन में कोई भूमिका नहीं दी गई।
नेतृत्व पर उपेक्षा के आरोप
उन्होंने लिखा कि कुमारी सैलजा से मुलाकात और उनके मंत्रालय द्वारा ₹18 करोड़ की स्वीकृति मिलने के बाद उन्हें “दरकिनार” कर दिया गया।
उन्हें केवल एक क्षेत्र तक सीमित कर दिया गया, जिससे वे पार्टी के लिए व्यापक स्तर पर काम नहीं कर पाए।
इनेलो और बीजेपी को मिला फायदा
2014 और 2019 में उन्हें टिकट नहीं दिया गया, परिणामस्वरूप नलवा और फतेहाबाद सीटें कांग्रेस हार गईं।
उनके अनुसार, “मेरे प्रभाव वाले क्षेत्रों में कांग्रेस को तब जीत मिली जब मैं सक्रिय था, और जब मुझे दरकिनार किया गया, पार्टी हार गई।”
2016 की राज्यसभा घटना का जिक्र
संपत सिंह ने 2016 की राज्यसभा चुनाव की घटना याद करते हुए लिखा कि आरके आनंद को समर्थन देने के बावजूद एक नेता को वोट न देने की अनुमति दी गई, जिससे सारे वोट निरस्त हो गए।
उन्होंने सवाल उठाया कि “जब सोनिया गांधी ने नाम को मंजूरी दी थी, तो एक राज्य नेता को विरोध की छूट क्यों दी गई?”
2019–2024 के घटनाक्रम और गुटबाजी
उन्होंने अपने पत्र में कुमारी सैलजा, किरण चौधरी, श्रुति चौधरी, सावित्री जिंदल, और नवीन जिंदल जैसे नेताओं के साथ हुए व्यवहार पर भी सवाल उठाए।
उनका आरोप था कि “राज्य नेतृत्व ने व्यक्तिगत शक्ति को मजबूत किया, न कि पार्टी संगठन को।”
कांग्रेस नेतृत्व पर गंभीर आरोप
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राज्यसभा सीट पर पारिवारिक राजनीति का आरोप — अनुसूचित जाति या पिछड़ा वर्ग के नेता की जगह “नेता के पुत्र” को नामित किया गया।
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रणदीप सिंह सुरजेवाला को हरियाणा की गुटबाजी के कारण राजस्थान भेजा गया।
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अजय माकन का राज्यसभा चुनाव हारना “नेतृत्व संकट” का परिणाम बताया।
इस्तीफे का असर: हरियाणा की राजनीति में नई हलचल
संपत सिंह लंबे समय से हरियाणा कांग्रेस के सीनियर नेता रहे हैं।
उनके इस्तीफे से पार्टी को संगठनात्मक और जनाधार दोनों स्तरों पर झटका लग सकता है।
विशेषकर आगामी विधानसभा चुनावों से पहले यह कदम कांग्रेस के लिए चिंताजनक संकेत है।
