काशीबुग्गा वेंकटेश्वर मंदिर हादसा: रेलिंग टूटने से मची भगदड़ में 9 की मौत, 15 से ज्यादा घायल — सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल

काशीबुग्गा वेंकटेश्वर मंदिर हादसा: रेलिंग टूटने से मची भगदड़ में 9 की मौत, 15 से ज्यादा घायल — सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल

श्रीकाकुलम (आंध्र प्रदेश)।
आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के काशीबुग्गा वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में एकादशी के दिन भगदड़ मच गई।
इस दर्दनाक हादसे में 9 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 15 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
हादसा उस वक्त हुआ जब मंदिर की सीढ़ियों पर लगी लोहे की रेलिंग भीड़ के दबाव में टूट गई और लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे।

चश्मदीदों के मुताबिक, “अगर मंदिर में दूसरा रास्ता या पर्याप्त पुलिस तैनात होती, तो इतनी बड़ी त्रासदी टल सकती थी।”
इस घटना ने मंदिरों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


1 नवंबर की सुबह: एकादशी और शनिवार का संयोग

हादसा 1 नवंबर की सुबह करीब 10 बजे हुआ।
उस दिन एकादशी थी और शनिवार के चलते श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य से कई गुना अधिक थी।
मंदिर परिसर में करीब 3,000 से ज्यादा लोग मौजूद थे।

64 वर्षीय येलाप्रगदा लक्ष्मी, जो हादसे की चश्मदीद हैं, बताती हैं —

“रेलिंग टूटते ही महिलाएं और बच्चे नीचे गिर गए। चीख-पुकार मच गई।
जो गिरा, वह फिर उठ नहीं पाया। हवा तक नहीं थी, लोगों का दम घुट रहा था।”

लक्ष्मी और उनकी बहन मंदिर के पिछले हिस्से की ओर भागकर बच गईं।


रेलिंग टूटी, भगदड़ मची, लोग कुचल गए

मंदिर की सीढ़ियों पर लगी रेलिंग 8 से 10 फीट ऊंची थी।
भीड़ बढ़ने से जब रेलिंग टूटी, तो लोग नीचे गिर पड़े।
उस संकरे रास्ते पर सांस लेने तक की जगह नहीं थी

चश्मदीदों के अनुसार —

“अगर पुलिस या सिक्योरिटी गार्ड वहां मौजूद होते, तो हालात काबू में आ सकते थे।
लेकिन किसी भी तरह का सुरक्षा इंतजाम नहीं था।”


मंदिर के मुख्य पुजारी पर केस दर्ज

मंदिर के प्रशासक 94 वर्षीय हरिमुकुंद पांडा के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या (IPC 304A) का केस दर्ज किया गया है।
उनके साथ मंदिर प्रबंधन के दो अन्य सदस्यों को हिरासत में लिया गया है।

हरिमुकुंद पांडा का कहना है —

“हमने सोचा नहीं था कि इतने भक्त आ जाएंगे।
मैं भगवान वेंकटेश्वर स्वामी से प्रार्थना करता हूं कि मरने वालों की आत्मा को शांति मिले।”


पांडा की जिद से बना था यह मंदिर

हरिमुकुंद पांडा ने अपने 12 एकड़ के खेत में करीब 10 करोड़ रुपए की लागत से यह मंदिर बनवाया था
13 साल पहले तिरुमला मंदिर में उन्हें एक अपमानजनक अनुभव हुआ था, जिसके बाद उन्होंने तय किया कि वे तिरुपति बालाजी जैसा मंदिर अपने गांव काशीबुग्गा में बनाएंगे।

मंदिर को सिर्फ चार महीने पहले ही सार्वजनिक दर्शन के लिए खोला गया था, और तेजी से प्रसिद्धि मिलने के बाद यहां भारी भीड़ जुटने लगी थी।


स्थानीय MLA बोलीं — “भीड़ के अनुमान से ज्यादा लोग आ गए”

पलासा की MLA गौथु सीरीशा, जो घटना के बाद मौके पर पहुंचीं, ने कहा —

“मंदिर निजी मैनेजमेंट के अधीन है।
बुजुर्ग पुजारी पांडा को अंदाजा नहीं था कि इतने लोग आ जाएंगे।
हादसे के बाद मंदिर को फिलहाल बंद कर दिया गया है।”

उन्होंने बताया कि 15 बच्चे और 5 महिलाएं घायल हैं, जिन्हें विशाखापट्टनम और स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।


पुलिस बोली — ‘मंदिर प्रशासन ने अनुमति नहीं ली थी’

श्रीकाकलम के SP केवी महेश्वर रेड्डी के अनुसार —

“मंदिर में न तो अलग एंट्री-एग्जिट गेट था, न पुलिस परमिशन ली गई थी।
जब तक पुलिस मौके पर पहुंची, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।”

हालांकि, दैनिक भास्कर को मिले एक वीडियो में हरिमुकुंद पांडा ने पुलिस के इस बयान को झूठा बताया,
कहते हुए कि —

“हमने एक दिन पहले ही पुलिस को आयोजन की जानकारी दे दी थी।”


सरकार की घोषणा: मृतकों के परिवार को ₹15 लाख मुआवजा

आंध्र प्रदेश के CM चंद्रबाबू नायडू ने हादसे की हाई-लेवल जांच के आदेश दिए हैं।
राज्य के शिक्षा मंत्री नारा लोकेश ने घोषणा की —

  • मरने वालों के परिवार को ₹15 लाख की सहायता राशि,

  • गंभीर रूप से घायल लोगों को ₹3 लाख,

  • और TDP कार्यकर्ताओं के परिवारों को पार्टी बीमा योजना से अतिरिक्त ₹5 लाख दिए जाएंगे।


जर्नलिस्ट बोले — ‘पुलिस का सीधा फेलियर’

सीनियर जर्नलिस्ट मोहम्मद इलियास का कहना है —

“काशीबुग्गा हादसा सीधे तौर पर पुलिस की नाकामी है।
मंदिर समिति ने पहले ही सूचना दी थी, फिर भी फोर्स तैनात नहीं थी।
यहां 10 हजार से ज्यादा लोग पहुंच गए और सुरक्षा व्यवस्था नाममात्र की थी।”

उन्होंने सुझाव दिया कि —

“सरकार को हर मंदिर समिति को लोकल पुलिस स्टेशन से जोड़ने का कानून बनाना चाहिए,
ताकि ऐसे हादसे दोबारा न हों।”

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