जाजनवाला का लाल अमरजीत नैन हुआ अमर: जम्मू-कश्मीर में ड्यूटी के दौरान शहीद, राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
हरियाणा के जींद जिले के जाजनवाला गांव का एक और लाल देश के लिए अमर हो गया।
भारतीय सेना के जवान अमरजीत नैन का मंगलवार को उनके पैतृक गांव में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
उनके चचेरे भाई सुशील ने उन्हें मुखाग्नि दी।
इस दौरान ग्रामीणों की आंखें नम थीं और “अमरजीत अमर रहे” के नारे गूंज रहे थे।
जम्मू-कश्मीर में हादसे में हुई शहादत
अमरजीत नैन की ड्यूटी जम्मू-कश्मीर के पुंछ में थी।
सोमवार को वे अपनी सर्विस राइफल की सफाई कर रहे थे, तभी दुर्घटनावश गोली चल गई, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।
उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
दस साल पहले सेना में भर्ती, देशभक्ति थी जीवन का लक्ष्य
अमरजीत नैन ने एनसीसी कैडर से आर्मी में भर्ती होकर देश की सेवा शुरू की थी।
उन्होंने 12वीं और आईटीआई करने के बाद 23 सितंबर 2015 को सेना ज्वाइन की थी।
वे 7 जाट बटालियन में पोस्ट नायक के पद पर कार्यरत थे।
उनके ताऊ के बेटे टेकराम ने बताया कि अमरजीत अक्सर कहा करते थे —
“जब भी लौटूंगा, तिरंगे में लिपट कर ही आऊंगा।”
यह याद करते हुए टेकराम भावुक हो उठे।
परिवार का गर्व और दर्द
अमरजीत के पिता रमेश कुमार किसान हैं।
परिवार में दो भाई और एक बहन हैं —
बड़ा भाई बलिंद्र, जो प्राइवेट अस्पताल में नौकरी करता है,
और बहन कविता, जिसकी शादी हो चुकी है और उसके पति भी आर्मी में हैं।
अमरजीत परिवार में सबसे छोटे थे।
दो साल पहले शादी, सात महीने की बेटी
दो साल पहले अमरजीत की शादी प्रियंका (निवासी नहला, हिसार) से हुई थी।
वे एक 7 महीने की बच्ची के पिता थे।
करीब एक महीने पहले ही वे सिर्फ एक दिन के लिए घर आए थे,
जब वे दिल्ली से सेना की डाक लेने आए थे।
शहादत से दो दिन पहले हुई आखिरी बात
परिवार ने बताया कि दो दिन पहले अमरजीत से फोन पर बात हुई थी।
उन्होंने बताया था कि अब मोबाइल जमा हो जाएंगे,
“दो दिन बाद बात करूंगा।”
लेकिन दो दिन बाद ही उनकी शहादत की खबर घर पहुंची।
जाजनवाला से एक साल में दूसरी शहादत
अमरजीत नैन से पहले, जवान प्रदीप नैन भी इसी गांव से
कश्मीर में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हुए थे।
गांववासियों ने कहा कि
“हमारा गांव छोटा है, लेकिन हर घर में एक सैनिक है — और हर दिल में देशभक्ति।”
श्रद्धांजलि
जवान अमरजीत नैन की शहादत ने पूरे हरियाणा को गर्व से भर दिया है।
उनकी यादें हमेशा देश के युवाओं को प्रेरित करेंगी कि
देश की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।
