पूर्व मंत्री संपत सिंह और बेटे गौरव सिंह ने छोड़ी कांग्रेस, INLD में की घर वापसी: बोले – “अब वहीं करूंगा काम, जहां से राजनीति शुरू की थी”

पूर्व मंत्री संपत सिंह और बेटे गौरव सिंह ने छोड़ी कांग्रेस, INLD में की घर वापसी: बोले – “अब वहीं करूंगा काम, जहां से राजनीति शुरू की थी”

हरियाणा की राजनीति में एक बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। राज्य के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री संपत सिंह ने कांग्रेस छोड़कर अपने बेटे गौरव सिंह के साथ इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) में घर वापसी कर ली है। उन्होंने बुधवार को चंडीगढ़ में इनेलो प्रमुख अभय चौटाला की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली।

यह वही इनेलो है, जिससे संपत सिंह ने 16 साल पहले 2009 में कांग्रेस जॉइन करने के लिए विदाई ली थी।


 कांग्रेस से इस्तीफे की वजह

3 नवंबर को संपत सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को इस्तीफा भेजा था। उनके बेटे गौरव सिंह ने भी सोशल मीडिया पर पार्टी छोड़ने का ऐलान करते हुए लिखा था —

“थारी कांग्रेस, थानै मुबारक।”

संपत सिंह ने बताया कि कांग्रेस में उनके साथ न्याय नहीं हुआ। उन्होंने कहा —

“मैंने पार्टी के लिए मेहनत की, कई सीटों पर जीत दिलाई, फिर भी न मंत्री बनाया गया, न पद दिया गया। अब मैं वहां लौट रहा हूं, जहां से राजनीति शुरू की थी।”


 कांग्रेस के अंदरूनी हालात पर निशाना

संपत सिंह ने अपने इस्तीफे में हरियाणा कांग्रेस के नेताओं की गुटबाजी और नेतृत्व की कमी पर गंभीर सवाल उठाए।
उन्होंने लिखा कि—

  • कुमारी सैलजा, किरण चौधरी, सावित्री जिंदल, नवीन जिंदल जैसे कई दिग्गजों को पार्टी ने नज़रअंदाज़ किया।

  • पार्टी अब “एक परिवार की कंपनी” बनकर रह गई है।

  • 2024 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार “अंदरूनी कमजोर नेतृत्व” की वजह से हुई।

उन्होंने यह भी कहा कि

“2020 में राज्यसभा की खाली सीट पर योग्य SC या OBC उम्मीदवार भेजने की बजाय एक नेता के बेटे को भेज दिया गया — यही कांग्रेस की गिरती सोच को दिखाता है।”


 संपत सिंह का राजनीतिक सफर

विवरण जानकारी
राजनीतिक शुरुआत 1977 में ताऊ देवीलाल के साथ
पहला चुनाव 1977 में फतेहाबाद की भट्टू सीट से
विधानसभा सदस्य 6 बार निर्वाचित
मंत्री पद 2 बार वित्त मंत्री, 1 बार विपक्ष के नेता
शिक्षा राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर रह चुके हैं
महत्वपूर्ण जीत नलवा से चुनाव लड़कर भजनलाल की पत्नी जसमा देवी को हराया
इनेलो में भूमिका 32 साल तक पार्टी में रहे
सरकार में योगदान 1987 और 1999 में इनेलो-भाजपा गठबंधन सरकार में अहम भूमिका
महत्वपूर्ण उपलब्धि हरियाणा को VAT लागू करने वाला पहला राज्य बनाया

 “ताऊ देवीलाल मेरे राजनीतिक गुरु हैं”

संपत सिंह ने कहा —

“मैंने राजनीति में कदम ताऊ देवीलाल के कहने पर रखा था। वे मेरे राजनीतिक गुरु हैं। 1977 में जब मैं हिसार के जाट कॉलेज में प्रोफेसर था, तभी उन्होंने मुझे राजनीति में आने का प्रस्ताव दिया। उन्होंने मुझे फतेहाबाद की भट्टू विधानसभा से टिकट दिया और वहीं से मेरी राजनीतिक यात्रा शुरू हुई।”


 2016 की घटना का जिक्र

संपत सिंह ने 2016 के राज्यसभा चुनाव का जिक्र करते हुए लिखा कि कांग्रेस नेतृत्व ने उस वक्त आर.के. आनंद को उम्मीदवार बनाया था, जिन्हें कांग्रेस और इनेलो के 37 विधायकों का समर्थन हासिल था,

“फिर भी एक नेता को वोट न करने की अनुमति दी गई। यहां तक कि एक निर्दलीय विधायक को जानबूझकर अलग पेन से वोट डालने के लिए कहा गया, जिससे सारे वोट रद्द हो गए।”


 “काम करने वाला व्यक्ति हूं, अब फिर इनेलो में करूंगा सेवा”

संपत सिंह ने कहा —

“मैंने हमेशा काम किया है, पद के लिए राजनीति नहीं की। कांग्रेस में अब वैसी जगह नहीं रही जहां मेहनती व्यक्ति को सम्मान मिले। इनेलो में मुझे फिर से जनता के बीच काम करने का मौका मिलेगा।”


 नीतिगत योगदान

  • हरियाणा के वित्त मंत्री रहते हुए डॉ. मनमोहन सिंह के सहयोग से राज्य को वित्तीय सुधारों में आगे बढ़ाया।

  • हरियाणा VAT लागू करने वाला पहला राज्य बना।

  • 1987 और 1999 में इनेलो-भाजपा गठबंधन सरकार के गठन में अहम भूमिका निभाई।

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