टूटा रिकॉर्ड! मोदी सरकार के कार्यकाल में पहली बार खुदरा महंगाई सबसे निचले स्तर पर

टूटा रिकॉर्ड! मोदी सरकार के कार्यकाल में पहली बार खुदरा महंगाई सबसे निचले स्तर पर

नई दिल्ली:
देशवासियों के लिए राहत भरी खबर आई है। अक्टूबर 2025 के खुदरा महंगाई (Retail Inflation) के आंकड़े जारी हो चुके हैं और ये ऐतिहासिक गिरावट दर्शाते हैं।
नवीनतम सरकारी डेटा के मुताबिक, भारत की खुदरा महंगाई दर सिर्फ 0.25% पर आ गई है — जो मोदी सरकार के पूरे कार्यकाल की सबसे कम दर है।

सितंबर में यह दर 1.44% थी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट मुख्य रूप से GST दरों में कटौती और खाद्य वस्तुओं के दामों में गिरावट की वजह से हुई है।


शहर से गांव तक मिली राहत

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर महीने में महंगाई में व्यापक गिरावट दर्ज की गई है।
GST में कटौती से उपभोक्ताओं को सीधा फायदा हुआ है, जबकि सब्जियों और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली है।

  • ग्रामीण इलाकों में खाद्य महंगाई दर: -4.85%

  • शहरी इलाकों में खाद्य महंगाई दर: -5.18%
    कुल मिलाकर खाद्य महंगाई दर -5.02% रही।

इससे यह साफ होता है कि महंगाई पर काबू सिर्फ शहरों में नहीं, बल्कि गांवों में भी हुआ है।


लगातार चौथे महीने महंगाई नियंत्रण में

पिछले साल अक्टूबर 2024 में खुदरा महंगाई दर 6.21% थी।
यानी एक साल में महंगाई में लगभग 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

यह लगातार चौथा महीना है जब खुदरा महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के तय 4% दायरे से नीचे बनी हुई है।
यह सरकार के मुद्रास्फीति नियंत्रण प्रयासों की बड़ी सफलता मानी जा रही है।


GST कटौती बनी गेमचेंजर

सरकार का कहना है कि GST दरों में कटौती का असर हर सेक्टर पर पड़ा है।
सितंबर में लागू हुए बदलावों के बाद, लगभग 99% रोजमर्रा के सामान 5% टैक्स स्लैब में आ गए हैं।
इससे डेयरी उत्पादों, पर्सनल केयर आइटम्स और घरेलू सामानों के दामों में बड़ी गिरावट आई है।


अमेरिकी टैरिफ अटैक के बावजूद राहत

अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ के बीच, सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए GST कटौती का फैसला किया था।
इससे घरेलू बाजार में मांग बढ़ी और सब्जियों के दामों में करीब 27.57% की गिरावट दर्ज की गई।


विशेषज्ञों की राय

आर्थिक जानकारों का मानना है कि सरकार के निर्णयों ने महंगाई को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह रुझान जारी रहता है तो RBI ब्याज दरों में कटौती पर भी विचार कर सकता है, जिससे आगे चलकर आर्थिक विकास को बल मिल सकता है।

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