हिसार में ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे — नारनौंद में विद्यार्थियों ने गीत, कविता और नृत्य से जगाई देशभक्ति की भावना
हिसार जिले में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में शुक्रवार को नारनौंद के राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में उपमंडल स्तरीय समारोह का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर विद्यालय परिसर में देशभक्ति और सांस्कृतिक रंग देखने को मिले। कार्यक्रम में मार्केट कमेटी नारनौंद के चेयरमैन विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और विद्यार्थियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी दिखाया गया।
‘वंदे मातरम’ के स्वर से गूंजा विद्यालय परिसर
समारोह की शुरुआत दीप प्रज्वलन और ‘वंदे मातरम’ के सामूहिक गान से हुई। विद्यार्थियों ने देशभक्ति से ओतप्रोत गीत, कविताएं और नृत्य नाटिकाएं प्रस्तुत कीं, जिन्होंने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।
हर प्रस्तुति में राष्ट्रीय एकता, मातृभूमि के प्रति प्रेम और देशभक्ति की भावना झलकती रही।
मुख्य अतिथि मास्टर उदय सिंह लोहान ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि “‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा है।”
उन्होंने कहा कि इस गीत ने करोड़ों भारतीयों के दिलों में आजादी का जुनून जगाया और देशसेवा का भाव प्रबल किया। उन्होंने युवा पीढ़ी से अपने इतिहास, संस्कृति और परंपराओं को जानने व संजोने का आग्रह किया, क्योंकि यही राष्ट्र निर्माण की सच्ची नींव है।
शिक्षा में देशप्रेम और अनुशासन का समावेश
विद्यालय के प्राचार्य जितेंद्र सोनी ने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में अनुशासन, देशप्रेम और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करते हैं।
उन्होंने बताया कि विद्यालय में राष्ट्रभक्ति, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ी गतिविधियाँ नियमित रूप से आयोजित की जाती हैं।
जोश और गर्व से गूंजा ‘वंदे मातरम’
कार्यक्रम का समापन सभी उपस्थित लोगों द्वारा पूरे जोश और गर्व के साथ ‘वंदे मातरम’ के सामूहिक गायन से हुआ।
इस अवसर पर खंड शिक्षा अधिकारी देवेंद्र सिंह, प्रिंसिपल अरुण लोहान, अजय लोहान, अंजना मिगलानी, राजेश कुमार, सतबीर सिंह, नरेश रोहिल्ला सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी और क्षेत्र के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
इस आयोजन ने न केवल विद्यार्थियों में देशभक्ति की भावना को प्रबल किया, बल्कि उन्हें अपने संविधान, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता के महत्व को समझने की प्रेरणा भी दी।
