एअर इंडिया ने मांगी ₹10,000 करोड़ की मदद: अहमदाबाद क्रैश के बाद स्थिति बिगड़ी, सिस्टम्स अपग्रेड करेगी एयरलाइन
भारत की प्रमुख एविएशन कंपनी एअर इंडिया ने अपने ओनर्स टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस से 1.14 बिलियन डॉलर (लगभग ₹10,000 करोड़) की वित्तीय सहायता मांगी है। यह कदम उस समय उठाया गया है जब जून में अहमदाबाद एयर क्रैश ने पूरी कंपनी को झकझोर दिया था। हादसे में 261 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 241 यात्री शामिल थे।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी यह फंड सिस्टम्स और सर्विसेज के ओवरहॉल (Overhaul) यानी पुरानी तकनीकों, प्रक्रियाओं और उपकरणों की जांच, सुधार और अपग्रेड के लिए चाहती है।
कंपनी के ओनर्स तय करेंगे फंड का स्वरूप
एअर इंडिया के दो मुख्य ओनर्स —
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टाटा संस (74.9% हिस्सेदारी)
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सिंगापुर एयरलाइंस (25.1% हिस्सेदारी)
इन दोनों के बीच यह तय किया जाएगा कि यह सहायता इंटरेस्ट-फ्री लोन होगी या इक्विटी इन्वेस्टमेंट। फंडिंग का वितरण उनकी हिस्सेदारी के अनुपात में किया जाएगा।
कंपनी ने बताया कि यह राशि केवल ऑपरेशंस को स्थिर करने और इंटरनल सिस्टम्स को मजबूत करने के लिए उपयोग होगी।
क्रैश के बाद सेफ्टी और सिस्टम सुधार पर फोकस
12 जून 2025 को अहमदाबाद में बोइंग 787 ड्रीमलाइनर के क्रैश के बाद भारत के एविएशन रेगुलेटर ने एअर इंडिया की सेफ्टी प्रैक्टिसेज की ऑडिट शुरू की थी। इसके चलते एयरलाइन को अपनी करीब 15% इंटरनेशनल फ्लाइट्स घटानी पड़ीं, जिससे रेवेन्यू पर बड़ा असर पड़ा।
CEO ने इस हफ्ते कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा —
“हम अपनी गलतियों से सीख रहे हैं। एअर इंडिया अब पहले से ज्यादा मजबूत होकर उभरेगी।”
घाटा खत्म करने के लक्ष्य से अब भी दूर
टाटा ग्रुप के अधिग्रहण के बाद से एअर इंडिया का लक्ष्य था कि मार्च 2026 तक घाटा खत्म कर कंपनी को प्रॉफिट में लाया जाए।
लेकिन अहमदाबाद क्रैश, एयरस्पेस प्रतिबंध और ऑपरेशनल चुनौतियों ने इस लक्ष्य को काफी पीछे धकेल दिया है।
वर्तमान में भारत की एकमात्र लाभदायक एयरलाइन इंडिगो है, जबकि बाकी कंपनियां फंडिंग की कमी से जूझ रही हैं।
एयरस्पेस प्रतिबंध से मुनाफे पर असर
मई में पाकिस्तान के साथ तनाव के बाद भारत से वेस्ट-बाउंड (यूरोप और अमेरिका जाने वाली) फ्लाइट्स को लंबा रूट लेना पड़ा।
इससे फ्यूल कॉस्ट बढ़ी और फ्लाइट टाइम भी लंबा हुआ, जिससे एअर इंडिया के मुनाफे में काफी गिरावट आई।
टाटा की ‘रिवाइवल प्लान’ पर फोकस
27 जनवरी 2022 को जब टाटा संस ने एअर इंडिया का अधिग्रहण किया, तो यह कदम भारत की एविएशन इंडस्ट्री के लिए ऐतिहासिक था।
टाटा ने कंपनी को आधुनिक बनाने के लिए कई कदम उठाए —
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नया लोगो और लिवरी (Air India Rebranding)
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बेड़े का विस्तार और नए Boeing-Airbus ऑर्डर
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कर्मचारियों के लिए ट्रेनिंग और टेक्नोलॉजी अपग्रेड
कंपनी का लक्ष्य है कि अमीरात, कतर एयरवेज और सिंगापुर एयरलाइंस जैसे वैश्विक कैरियर्स को प्रतिस्पर्धा दी जाए।
