बिहार चुनाव 2025: जनता को तेजस्वी पसंद, मगर बढ़त एनडीए की — सर्वे में दिलचस्प नतीजे

बिहार चुनाव 2025: जनता को तेजस्वी पसंद, मगर बढ़त एनडीए की — सर्वे में दिलचस्प नतीजे

बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग 6 नवंबर को होने वाली है। इस चरण में 18 जिलों की 121 सीटों पर मतदाता अपने प्रतिनिधियों का चयन करेंगे। मुकाबला एनडीए और महागठबंधन के बीच कड़ा दिख रहा है, वहीं जन सुराज जैसी नई ताकतें भी समीकरण बिगाड़ सकती हैं। तेजस्वी यादव, सम्राट चौधरी और मैथिली ठाकुर जैसे चर्चित चेहरों की साख भी इसी चरण में दांव पर है।

चुनावी मैदान में हर दल अपनी जीत के दावे कर रहा है—जहाँ एनडीए आत्मविश्वास से भरा है, वहीं महागठबंधन का कहना है कि इस बार जनता बदलाव चाहती है। इसी बीच सामने आए अलग-अलग सर्वेक्षणों ने राजनीतिक माहौल को और दिलचस्प बना दिया है।

सर्वे बताते हैं कि जनता मुख्यमंत्री के रूप में तेजस्वी यादव को देखना पसंद कर रही है, लेकिन सरकार एनडीए की बनने की संभावना जताई जा रही है। यानी चेहरा एक और सत्ता किसी और के पास — यह विरोधाभास राजनीतिक विश्लेषकों के लिए भी पहेली बना हुआ है।


सीटों के अनुमान: बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है

जेवीसी पोल के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 243 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए को 120–140 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि महागठबंधन 93–112 सीटों तक सीमित रह सकता है। बीजेपी 70 से 81 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर सकती है, वहीं जेडीयू को 42–48 सीटें मिल सकती हैं।
महागठबंधन में आरजेडी को 69–78 और कांग्रेस को 9–17 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है।


मुख्यमंत्री की पसंद: तेजस्वी आगे, नीतीश पीछे

जेवीसी पोल के अनुसार, जनता के बीच सबसे लोकप्रिय सीएम फेस तेजस्वी यादव हैं, जिन्हें 33% लोगों का समर्थन मिला। नीतीश कुमार को 29%, जबकि चिराग पासवान और प्रशांत किशोर को 10-10% लोगों ने पसंद किया।
वोट शेयर की बात करें तो एनडीए को 41–43% और महागठबंधन को 39–41% वोट मिलने का अनुमान है। जन सुराज पार्टी को लगभग 6–7% वोट मिलने की संभावना जताई गई है।


सी वोटर्स सर्वे: प्रशांत किशोर का उभार

सी वोटर्स के सर्वे में भी तेजस्वी यादव सबसे आगे दिखे, उन्हें 37% जनता ने पसंद किया। दिलचस्प यह है कि प्रशांत किशोर 24% के साथ दूसरे स्थान पर हैं, जबकि नीतीश कुमार 16% पर सिमट गए।
जब सर्वे केवल नीतीश बनाम तेजस्वी तक सीमित रहा, तब नीतीश को 46% और तेजस्वी को 41% समर्थन मिला। यानी नीतीश कुमार का व्यक्तिगत वोट बैंक अभी भी मजबूत है।
सी वोटर्स के मुताबिक, 62% लोगों ने नीतीश सरकार के कामकाज पर संतोष जताया है।


सर्वे की सच्चाई और मतदाताओं का मूड

चुनाव से पहले आने वाले सर्वे प्रायः सत्ताधारी दलों के पक्ष में झुकाव दिखाते हैं। कई बार नतीजे सर्वे से बिल्कुल अलग भी साबित हुए हैं — छत्तीसगढ़, पंजाब और दिल्ली के उदाहरण हाल के वर्षों में देखे जा चुके हैं।
बिहार में भी एनडीए और महागठबंधन के बीच अंतर बहुत कम है। जेवीसी पोल के मुताबिक, दोनों गठबंधनों के वोट शेयर में महज 2% का अंतर है। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि जन सुराज जैसी छोटी पार्टियाँ भी निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।

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