हिसार के वीर शहीद हवलदार पवन सिंधु पंचतत्व में विलीन — बेटे ने दी मुखाग्नि, गांव में गम का माहौल
राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
हरियाणा के हिसार जिले के गांव खांडा खेड़ी के वीर हवलदार पवन सिंधु आज पंचतत्व में विलीन हो गए।
उनके बड़े बेटे सौम्य सिंधु ने पिता को मुखाग्नि दी।
सेना और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
गांव में हजारों लोग शहीद को अंतिम विदाई देने पहुंचे।
हर आंख नम थी, और पूरा वातावरण “भारत माता की जय” के नारों से गूंज उठा।
अरुणाचल प्रदेश में ड्यूटी के दौरान हुआ हादसा
शहीद पवन सिंधु भारतीय सेना की 13 राजपूताना राइफल्स यूनिट में तैनात थे।
वे अरुणाचल प्रदेश के चीन बॉर्डर के पास बड़े रूपक क्षेत्र में अपनी ड्यूटी निभा रहे थे।
31 अक्टूबर को 13 दिन की पेट्रोलिंग के अंतिम दिन,
वे पहाड़ी के किनारे निरीक्षण कर रहे थे, तभी अचानक पैर फिसल गया और वे नीचे जा गिरे।
साथी जवानों ने काफी मशक्कत के बाद उन्हें ऊपर निकाला,
लेकिन अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
सेना के विमान से आया पार्थिव शरीर
रविवार को उनका पार्थिव शरीर दिल्ली एयरपोर्ट पर लाया गया,
जहां सेना के अधिकारियों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया।
इसके बाद सेना वाहन काफिले के साथ उनके पैतृक गांव खांडा खेड़ी (हिसार) पहुंचाया गया।
गांव में उनके अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
2003 में भर्ती, 22 साल की वीर सेवा
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हवलदार पवन सिंधु वर्ष 2003 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे।
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उन्होंने देश सेवा के दौरान कई सीमावर्ती इलाकों में ड्यूटी निभाई।
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2006 में उनकी शादी गांव झमोला निवासी रितु के साथ हुई थी।
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उनके दो बेटे हैं — सौम्य (17 वर्ष) और विनय (16 वर्ष), जो इस समय 11वीं कक्षा के छात्र हैं।
बेटे से हुई थी आखिरी बात — “सेना में आना, देश की सेवा करना”
शहीद के बेटे सौम्य ने बताया —
“पापा बहुत ही सरल और हंसमुख स्वभाव के थे।
जब भी छुट्टी लेकर घर आते, सबसे मिलते और सुबह की सैर जरूर करते।
29 अक्टूबर को आखिरी बार मेरी उनसे 2 मिनट बात हुई थी।
उन्होंने कहा था — बेटा, सेना और पुलिस की तैयारी करना, देश की सेवा करनी है।”
गांव में शोक और गर्व दोनों का माहौल
गांव खांडा खेड़ी में आज हर घर शोक में डूबा था,
लेकिन साथ ही पवन सिंधु की वीरता और समर्पण पर गर्व भी झलक रहा था।
लोगों ने कहा —
“हमारे गांव ने एक सच्चा सपूत खो दिया है, जिसने देश की सेवा में प्राण न्योछावर किए।
