हरियाणा कांग्रेस में फिर उभरा सैलजा बनाम हुड्डा गुट संघर्ष — अनुशासन समिति तक पहुंचा विवाद

हरियाणा कांग्रेस में फिर उभरा सैलजा बनाम हुड्डा गुट संघर्ष — अनुशासन समिति तक पहुंचा विवाद

 

सैलजा के बयान से बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी

हरियाणा कांग्रेस एक बार फिर आंतरिक खींचतान में फंस गई है।
पार्टी की सीनियर नेता और सिरसा से सांसद कुमारी सैलजा द्वारा पूर्व मंत्री संपत सिंह को लेकर दिए गए बयान ने कांग्रेस नेतृत्व को असहज कर दिया है।
मामला अब हरियाणा कांग्रेस अनुशासन समिति तक पहुंच चुका है।

हालांकि समिति के चेयरमैन पूर्व सांसद धर्मपाल मलिक ने सैलजा के बयान को “व्यक्तिगत और गैर-विवादित” बताते हुए सफाई दी है कि उन्होंने पार्टी लाइन से हटकर कोई बात नहीं की।


सैलजा बोलीं – ‘संपत सिंह का जाना दुखद, मेरी मदद करने का नुकसान उन्हें हुआ’

सैलजा ने सिरसा में बयान दिया था —

“संपत सिंह का पार्टी छोड़ना दुख और दुर्भाग्य की बात है।
उन्होंने मेहनत की, पहचान बनाई और मेरे चुनाव में मदद की।
शायद उनकी यही मदद उनके नुकसान का कारण बन गई।”

उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी में बाहर से आने वालों को प्राथमिकता दी गई जबकि “अपने नेताओं को गंभीरता से नहीं लिया गया।”

सैलजा का यह बयान कांग्रेस आलाकमान की उस नीति पर अप्रत्यक्ष हमला माना जा रहा है जिसमें पुराने नेताओं की अनदेखी और बाहरी चेहरों को तरजीह देने की बात कही जाती है।


किरण-श्रुति चौधरी के लिए कहा था – ‘उनके साथ अन्याय हुआ’

यह पहला मौका नहीं जब सैलजा ने खुलकर असहमति जताई हो।
जून 2024 में किरण चौधरी और उनकी बेटी श्रुति चौधरी के भाजपा में जाने पर उन्होंने कहा था —

“किरण जी और उनकी बेटी के साथ इंसाफ नहीं हुआ।
अगर पार्टी ने न्याय किया होता तो वे कांग्रेस में ही रहतीं।”

सैलजा के इस बयान को भी पार्टी के अंदरूनी असंतोष की अभिव्यक्ति माना गया था।


टिकट वितरण में अनदेखी से नाराजगी बढ़ी

2024 विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे को लेकर सैलजा और भूपेंद्र सिंह हुड्डा गुट में खुली तनातनी देखने को मिली।
सैलजा खेमे ने लगभग 30 से 35 सीटें मांगी थीं, लेकिन हाईकमान ने हुड्डा समर्थकों को 72 सीटें दे दीं।
सैलजा खेमे के हाथ केवल 4 सीटें लगीं।

उनके सबसे करीबी नेता डॉ. अजय चौधरी को नारनौंद सीट से टिकट न मिलने पर सैलजा ने नाराजगी जताई थी।


जातिगत टिप्पणी से बढ़ा विवाद

टिकट वितरण के अंतिम दिन नारनौंद में जस्सी पेटवाड़ के नामांकन कार्यक्रम के दौरान सैलजा पर एक कार्यकर्ता ने जातिगत टिप्पणी कर दी।
यह मामला तूल पकड़ गया और दलित समाज ने इसका विरोध किया।
नारनौंद थाने में संबंधित कार्यकर्ता के खिलाफ मामला भी दर्ज हुआ।

यह प्रकरण सैलजा के समर्थकों के बीच “सम्मान बनाम सत्ता” की बहस को और तेज कर गया।


हुड्डा बनाम सैलजा गुट: कांग्रेस में बढ़ती दरार

हरियाणा कांग्रेस लंबे समय से दो धड़ों में बंटी हुई है —

  1. हुड्डा पिता-पुत्र गुट

  2. सैलजा-समर्थक (पूर्व में SRK, अब SRB – सैलजा, बीरेंद्र, रंधावा)

किरण चौधरी के भाजपा में जाने के बाद बीरेंद्र सिंह अब सैलजा के करीब दिख रहे हैं।
चुनावी पोस्टर से लेकर प्रचार रैलियों तक दोनों गुटों के बीच स्पष्ट दूरी दिखाई दी।


नेताओं का पलायन और जिम्मेदारी हुड्डा पर

पिछले एक दशक में कांग्रेस से कई बड़े चेहरे अलग हुए हैं —

  • राव इंद्रजीत सिंह

  • धर्मबीर सिंह

  • रमेश कौशिक

  • चौधरी बीरेंद्र सिंह

  • कुलदीप बिश्नोई

  • किरण चौधरी व श्रुति चौधरी

  • संपत सिंह

इनमें से अधिकांश ने पार्टी छोड़ने का कारण भूपेंद्र सिंह हुड्डा की कार्यशैली को बताया।

फिलहाल बीरेंद्र सिंह ने ही कांग्रेस में वापसी की है, जबकि अन्य अब भी बाहर हैं।


अनुशासन समिति के पास शिकायतों की भरमार

अनुशासन समिति प्रमुख धर्मपाल मलिक ने बताया कि

“सैलजा का बयान व्यक्तिगत था। उन्होंने पार्टी लाइन से हटकर कुछ नहीं कहा।
हालांकि कई शिकायतें मिली हैं जिन्हें सूचीबद्ध किया जा रहा है।”

समिति के पास कुलदीप शर्मा और कैप्टन अजय यादव के बयानों की भी शिकायतें पहुंची हैं।
दोनों नेताओं ने भी हुड्डा नेतृत्व पर असंतोष जताया था।
हालांकि अभी किसी पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई है।

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