एक साथ जन्मी दोस्ती, एक साथ विदाई: बरोदा गांव के चार दोस्तों की दर्दनाक कहानी

एक साथ जन्मी दोस्ती, एक साथ विदाई: बरोदा गांव के चार दोस्तों की दर्दनाक कहानी

सोनीपत (हरियाणा):
हरियाणा के सोनीपत जिले के बरोदा गांव में चार जिगरी दोस्तों की मौत ने पूरे गांव को गहरे शोक में डुबो दिया है। ये चारों — साहिल मोर, आशीष मोर, परमजीत मोर और विवेक मोर — बचपन से लेकर आखिरी सांस तक एक-दूसरे के साथी रहे। शुक्रवार रात हरिद्वार जाने के दौरान इनकी कार शामली (उत्तर प्रदेश) में हादसे का शिकार हो गई। शनिवार को जब चारों का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया, तो पूरा गांव रो पड़ा।


साथ जन्मे, साथ जिए, साथ चले गए

चारों दोस्तों का रिश्ता खून से नहीं, बल्कि दिल से था। वे साथ स्कूल गए, साथ खेलते और हर त्यौहार एक-दूसरे के घर मनाते थे। जब गांव के श्मशान घाट पर चारों के पार्थिव शरीर एक साथ रखे गए, तो हर आंख नम थी। चारों को एक ही चिता पर लिटाया गया — गांववालों ने कहा, “जैसे जीवन में साथ थे, वैसे ही मृत्यु में भी साथ रहे।”


शादी की तैयारियों में जुटे थे, मगर किस्मत ने छीन ली खुशियां

परमजीत की शादी रविवार को राजस्थान में तय थी। आशीष की शादी दिसंबर में होनी थी, जबकि साहिल की हाल ही में फरवरी में हुई थी। सभी दोस्तों ने मिलकर शादी की खरीदारी, कपड़ों की योजना और जूते तक साथ चुने थे।
हरिद्वार जाने का कार्यक्रम उन्होंने शादी से पहले स्नान करने और आशीर्वाद लेने के लिए बनाया था। लेकिन यह यात्रा उनके जीवन की आखिरी यात्रा बन गई।


गांव में पसरा मातम — एक साथ जलती चार चिताएं

शनिवार को गांव के श्मशान में चारों दोस्तों का एक साथ अंतिम संस्कार हुआ।
परमजीत को उसके भाई के बेटे सोनू ने मुखाग्नि दी, साहिल को उसके भाई अंकित ने, आशीष को मामा के बेटे ने, और विवेक को उसके बड़े भाई राहुल ने मुखाग्नि दी।
गांव में किसी घर में चूल्हा नहीं जला। हर आंख में आंसू थे और हर दिल भारी। ग्रामीणों का कहना था — “गांव पर किसी की बुरी नजर लग गई।”


परिवारों का रिश्ता भी था दोस्ती जैसा गहरा

साहिल के चाचा अमरजीत ने बताया कि चारों परिवार एक-दूसरे के बेहद करीब थे। बच्चों ने एक-दूसरे के घरों में ही अपना बचपन बिताया था। वे हर छोटी-बड़ी खुशी साथ मनाते थे और हर फैसला साथ मिलकर लेते थे।


आशीष की बहन नहीं कर सकी भाई के अंतिम दर्शन

आशीष की बहन ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई कर रही थी। हादसे की खबर मिलते ही वह भारत लौटने के लिए रवाना हुई, लेकिन वह अपने भाई के अंतिम दर्शन नहीं कर सकी। परिवार ने बताया कि यह क्षण उनके लिए असहनीय था — एक भाई की लाश देखने की उम्मीद भी किस्मत ने छीन ली।


चारों दोस्तों की छोटी-सी दुनिया

  • परमजीत मोर (24 वर्ष): दो विवाहित बहनों का इकलौता भाई। खेतीबाड़ी करता था। 9 नवंबर को उसकी बारात जानी थी।

  • साहिल मोर (22 वर्ष): गांव मोईमाजरी के डाकघर में कार्यरत। फरवरी में शादी हुई थी। इकलौता बेटा।

  • आशीष मोर (24 वर्ष): खेतीबाड़ी में पिता का हाथ बंटाता था। अविवाहित। बहन ऑस्ट्रेलिया में पढ़ती है।

  • विवेक मोर (21 वर्ष): BA का छात्र। अविवाहित। हरिद्वार जाने का विचार उसी ने रखा था।


गांव की आंखों में आज भी वो चार मुस्कानें हैं

चारों की दोस्ती गांव की पहचान थी। वे अक्सर शाम को जोहड़ किनारे बैठते, बास्केटबॉल और क्रिकेट खेलते।
अब गांव में वही जोहड़ सन्नाटा ओढ़े हुए है। उनके घरों में मातम और गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ है।

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