फरीदाबाद से पलवल तक बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री की ‘सनातन एकता पदयात्रा’, बोले— “मुसलमानों को गालियां देने वाला कभी हिंदू नहीं हो सकता”

फरीदाबाद से पलवल तक बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री की ‘सनातन एकता पदयात्रा’, बोले— “मुसलमानों को गालियां देने वाला कभी हिंदू नहीं हो सकता”

पलवल/फरीदाबाद: बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की ‘सनातन एकता पदयात्रा’ का तीसरा दिन (10 नवंबर) हरियाणा में उत्साह और भक्ति से भरा रहा। यात्रा आज फरीदाबाद के सीकरी गांव से शुरू होकर पलवल जिले में दाखिल हुई। पदयात्रा अब सीनियर सेकेंडरी स्कूल की ओर बढ़ रही है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र हुए।


श्रद्धालुओं का उत्साह, पुष्पवर्षा और पगड़ी सम्मान

पदयात्रा के दौरान जगह-जगह श्रद्धालुओं ने धीरेंद्र शास्त्री का गर्मजोशी से स्वागत किया।
सिख समुदाय के लोगों ने उन्हें पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया, वहीं कई स्थानों पर JCB पर चढ़कर पुष्प वर्षा की गई।
यात्रा के दौरान एक युवक ने उन्हें टोपी गिफ्ट की, जिस पर धीरेंद्र शास्त्री ने मुस्कुराकर उसे आशीर्वाद दिया।
बाघोला गांव में एक भावुक व्यक्ति ने उनके पैर पकड़ लिए, तब शास्त्री ने उसके कंधे पर हाथ रखकर उसे अपने साथ चलाया — यह दृश्य देखकर कई लोगों की आंखें नम हो गईं।


शास्त्री का संदेश — “मुसलमानों को गालियां देने वाला कभी हिंदू नहीं हो सकता”

बाघोला में सभा को संबोधित करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा,

“मुसलमानों को गालियां देने वाला कभी हिंदू नहीं हो सकता।
हिंदू वह है, जो अपने सनातन के लिए तालियां बजवा दे, न कि किसी धर्म का अपमान करे।
इस देश में जितने मुसलमान हैं, उनमें ज्यादातर के पूर्वज हिंदू थे।
अब समय अच्छा है, अगर वे चाहें तो वापस आ सकते हैं।”

उनके इस बयान पर भीड़ ने तालियों के साथ समर्थन जताया।


मौलाना साजिद रशीदी को दिया जवाब

फरीदाबाद में धीरेंद्र शास्त्री ने मौलाना साजिद रशीदी के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा —

“यात्रा निकालने का हक सभी को है।
अगर मौलाना यात्राओं का मतलब समझते हैं, तो वे भी यात्रा निकालें।
लेकिन सनातन की यात्रा प्रेम और एकता का संदेश देने के लिए होती है, न कि किसी धर्म के खिलाफ।”

उन्होंने कहा कि “भारत धर्मनिरपेक्ष देश है, यहां हर किसी को अपने विचार और आस्था के अनुसार जीने का अधिकार है।”


पदयात्रा में उमड़ा जनसैलाब

‘सनातन एकता पदयात्रा’ में हरियाणा के कई जिलों से श्रद्धालु शामिल हुए। सड़क किनारे जगह-जगह जलपान और सेवा कैंप लगाए गए।
धीरेंद्र शास्त्री की झलक पाने के लिए बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं बड़ी संख्या में मौजूद रहीं।


समापन

धीरेंद्र शास्त्री की यह यात्रा न केवल धार्मिक आयोजन बन गई है, बल्कि सामाजिक सौहार्द और सनातन एकता का संदेश भी दे रही है। आने वाले दिनों में यह यात्रा पलवल से आगे राजस्थान सीमा की ओर बढ़ेगी।

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