हांसी की ऐतिहासिक आमटी झील बदहाल: वीरता की प्रतीक धरोहर अब बन गई लापरवाही की शिकार

हांसी की ऐतिहासिक आमटी झील बदहाल: वीरता की प्रतीक धरोहर अब बन गई लापरवाही की शिकार

हांसी | 8 नवंबर 2025 — हरियाणा के हिसार जिले के हांसी शहर की शान रही आमटी झील, जो कभी सैर-सपाटे, नौकायन और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध थी, आज प्रशासनिक उपेक्षा और लापरवाही के कारण बदहाली के दौर से गुजर रही है।
कभी यह झील राजा श्रीपाल की बेटी अमृति की शहादत से जुड़ी वीरता की मिसाल थी, लेकिन अब इसका अस्तित्व कचरे, गोबर और अव्यवस्था में दब गया है।


 इतिहास में दर्ज वीरता की गाथा

इतिहासकारों के अनुसार, सन् 1038 में हांसी पर राजा श्रीपाल का शासन था।
तुर्क सेना के आक्रमण के समय उनकी पुत्री राजकुमारी अमृति ने आत्मसम्मान की रक्षा के लिए इसी झील में कूदकर अपने प्राणों की आहुति दे दी
उनकी स्मृति में इस झील को “अमृति तालाब” कहा गया, जो समय के साथ “आमटी झील” के नाम से प्रसिद्ध हुई।
यह स्थल न केवल ऐतिहासिक महत्व रखता है, बल्कि हांसी की सांस्कृतिक पहचान भी है।


 2004 में हुआ था सौंदर्यीकरण, अब जर्जर हालत

जनवरी 2004 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने झील का सौंदर्यीकरण कर इसका उद्घाटन किया था।
उस समय यहां

  • आकर्षक लाइटिंग,

  • सुंदर हरियाली,

  • बैठने के लिए बेंच,

  • और नौकायन की सुविधा भी थी।

लोग परिवारों के साथ यहां शामें बिताने आते थे।
लेकिन अब झील का सारा आकर्षण मिट चुका है
पानी की जगह कचरे के ढेर,
दीवारों पर गोबर के उपले,
और झील में भैंसें बंधी नजर आती हैं


 अधूरे वादे और रुकी परियोजनाएं

मार्च 2023 में विधायक विनोद भयाना ने झील के पुनर्सौंदर्यीकरण और पानी निकासी नाले के निर्माण कार्य का शिलान्यास किया था।
इसके बाद जुलाई 2025 में एसडीएम राजेश खोथ ने झील की सूरत एक महीने में बदलने का आश्वासन दिया था।
लेकिन नवंबर 2025 तक भी कोई खास सुधार नजर नहीं आया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि काम केवल घोषणाओं तक सीमित है।


 नशेड़ियों और आवारा तत्वों का अड्डा

वर्तमान में झील परिसर में नशेड़ियों और आवारा तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है।
यहां दिन के समय भी लोग रुकने से कतराते हैं
भैंसें बांधने, गोबर के ढेर और गंदगी के कारण पूरा क्षेत्र दुर्गंध से भर गया है
आसपास के लोगों ने कई बार प्रशासन को शिकायतें दीं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।


 पूर्व मंत्री सुभाष गोयल ने जताई चिंता

पूर्व मंत्री सुभाष गोयल ने कहा कि “आमटी झील केवल एक तालाब नहीं, बल्कि यह हांसी की गौरवशाली इतिहास की जीवंत निशानी है।”
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द कदम नहीं उठाए, तो यह ऐतिहासिक धरोहर आने वाली पीढ़ियों के लिए केवल इतिहास की किताबों में रह जाएगी।


 जनता की मांग: धरोहर को बचाओ

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संस्थाओं ने आमटी झील के संरक्षण और पुनर्निर्माण की मांग उठाई है।
लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन ईमानदारी से काम करे, तो झील फिर से हांसी का प्रमुख पर्यटन स्थल बन सकती है।

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