पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने पर पति को 5 साल की सजा — हिसार अदालत का बड़ा फैसला
हिसार की अदालत का सख्त रुख
हरियाणा के हिसार जिला अदालत ने एक संवेदनशील मामले में कठोर फैसला सुनाया है।
एडीजे निशांत शर्मा की अदालत ने पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में हांसी के डडल पार्क निवासी अंकुर सैनी को दोषी करार देते हुए 5 साल की कैद और ₹11,000 जुर्माने की सजा सुनाई है।
यह मामला वर्ष अप्रैल 2022 का है, जब सैनियाना मोहल्ला निवासी सौम्या ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। प्रारंभ में यह एक सामान्य सुसाइड प्रतीत हुआ, लेकिन बाद में मिले मोबाइल सबूतों और रिकॉर्डिंग्स ने पूरी कहानी पलट दी।
घटना का पूरा सिलसिला
अप्रैल 2022 — आत्महत्या और प्रारंभिक जांच
25 अप्रैल 2022 को सौम्या के पति जिले सिंह ने एचटीएम थाना पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी।
पहले परिवार ने इसे मानसिक तनाव या पारिवारिक कारणों से हुई आत्महत्या माना।
लेकिन जब पुलिस ने सौम्या के मोबाइल डेटा की जांच की, तो सामने आए तथ्य चौंकाने वाले थे।
मोबाइल रिकॉर्डिंग ने खोला सच
पुलिस को सौम्या के मोबाइल में 15 अप्रैल 2022 की रात की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग मिली।
इसमें आरोपी अंकुर सैनी सौम्या को गालियां दे रहा था, धमका रहा था और आत्महत्या के लिए उकसा रहा था।
रिकॉर्डिंग में सौम्या की आखिरी बात सुनाई देती है —
“तेरी वजह से ये आखिरी फोन है, आज तेरे मजबूर करने पर मैं अपना जीवन खत्म कर रही हूं।”
इसके बावजूद अंकुर सैनी उसे अपमानित करता रहा और उसे मानसिक रूप से तोड़ता गया।
ब्लैकमेल और पैसों की जबरन वसूली का खुलासा
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि अंकुर सैनी सौम्या को ब्लैकमेल कर पैसे ऐंठ रहा था।
सौम्या की बहन ने 19 मार्च 2022 को ₹19,000 की रकम अंकुर के खाते में ट्रांसफर की थी।
पुलिस को बैंक ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड भी मिला, जिसने ब्लैकमेलिंग के एंगल को पुष्ट किया।
पुलिस कार्रवाई और केस दर्ज
सभी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने अंकुर सैनी के खिलाफ निम्नलिखित धाराओं के तहत केस दर्ज किया:
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IPC धारा 306: आत्महत्या के लिए उकसाना
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IPC धारा 294: अश्लील भाषा या हरकतें
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IPC धारा 506: आपराधिक धमकी
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IT Act: डिजिटल माध्यम से उत्पीड़न और ब्लैकमेल
करीब साढ़े तीन साल तक चली सुनवाई के बाद, अदालत ने सभी गवाहों, ऑडियो सबूतों और डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर अंकुर सैनी को दोषी पाया।
अदालत का फैसला
गुरुवार को अदालत ने आरोपी को 5 साल की सख्त सजा सुनाते हुए कहा कि —
“डिजिटल उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना आज के समाज में उतनी ही खतरनाक है जितनी शारीरिक हिंसा। ऐसे अपराधों पर सख्त सजा ही समाज में उदाहरण बन सकती है।”
अदालत ने आरोपी पर ₹11,000 का जुर्माना भी लगाया है, जो पीड़िता के परिवार को दिया जाएगा।
मामले का सामाजिक संदेश
यह फैसला उन सैकड़ों महिलाओं के लिए नजीर है जो भावनात्मक ब्लैकमेल, साइबर उत्पीड़न या मानसिक हिंसा का सामना कर रही हैं।
कानून अब सिर्फ शारीरिक हिंसा नहीं, बल्कि डिजिटल और मानसिक उत्पीड़न को भी गंभीर अपराध मानता है।
यदि कोई भी व्यक्ति इस तरह की प्रताड़ना झेल रहा है, तो 1091 (महिला हेल्पलाइन) या 181 (महिला सहायता सेवा) पर तुरंत संपर्क करें।
