जुलाना बनाम रोहतक : चौटाला परिवार की दो रैलियों से हरियाणा की राजनीति में नया गर्मा-गर्म मुकाबला

जुलाना बनाम रोहतक : चौटाला परिवार की दो रैलियों से हरियाणा की राजनीति में नया गर्मा-गर्म मुकाबला

जननायक जनता पार्टी (JJP) के स्थापना दिवस पर 6 दिसंबर को जींद के जुलाना में हुई प्रदेश स्तरीय रैली ने हरियाणा की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। यह रैली इसलिए भी खास रही क्योंकि इसके ठीक ढाई महीने पहले 25 सितंबर को रोहतक में इनेलो (INLD) अपनी बड़ी शक्ति प्रदर्शन रैली कर चुका था।
दोनों रैलियों को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों से लेकर चौटाला परिवार के समर्थकों तक भारी चर्चा रही — वजह साफ है, पूर्व मुख्यमंत्री ओपी चौटाला के निधन के बाद दोनों पार्टियों का यह पहला बड़ा राजनीतिक प्रदर्शन था।


दोनों रैलियों में एक जैसा ‘टारगेट’ — हुड्डा और भाजपा

जुलाना हो या रोहतक, दोनों जगह मंच एक ही दिशा में निशाना साधते दिखे।
भाजपा और कांग्रेस के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा दोनों ही रैलियों में केंद्र में रहे।

मंचों पर ताऊ देवीलाल और ओपी चौटाला के बड़े पोस्टर लगे, लेकिन फर्क यह रहा कि—

  • इनेलो ने खुलकर देवीलाल और ओपी चौटाला का नाम लिया,

  • जबकि जजपा रैली में ओपी चौटाला का नाम संबोधन में तक नहीं आया।

इनेलो सुप्रीमो अभय चौटाला ने पहले ही जजपा को ‘चौटाला नाम व फोटो’ इस्तेमाल करने को लेकर चेतावनी दी थी, और दुष्यंत चौटाला ने जुलाना के मंच से ओपी चौटाला का नाम बिल्कुल नहीं लिया।


2018 में टूटा था घर — आज भी दोनों ओर दिखती है वही दरार

अक्टूबर 2018 की गोहाना रैली में दुष्यंत के समर्थन में लगे नारों ने चौटाला परिवार को दो हिस्सों में बांटा था।
इसी के बाद

  • अजय चौटाला ने INLD छोड़कर JJP बनाई,

  • और इनेलो का नेतृत्व अभय चौटाला के हाथ में आ गया।

2024 में ओपी चौटाला के निधन के बाद माना जा रहा था कि शायद दूरी कम हो, लेकिन जुलाना और रोहतक की रैलियों ने दिखा दिया कि दोनों भाई अपनी-अपनी राह मज़बूती से बनाए हुए हैं।


बड़े नेता गायब – दोनों रैलियों में ‘पुरानी चमक’ नहीं दिखी

चौटाला परिवार की रैलियां हमेशा बड़े राष्ट्रीय नेताओं का जमावड़ा होती थीं, लेकिन इस बार तस्वीर अलग रही।

इनेलो की रोहतक रैली में:

  • सुखबीर बादल

  • तेलंगाना की पूर्व सांसद कविता

  • जम्मू के डिप्टी CM सुरेंद्र

  • लंदन काउंसलर रोहित अहलावत
    मुख्य चेहरे रहे।

हालांकि इनमे कोई भी बड़ा राष्ट्रीय स्तर का नेता शामिल नहीं हुआ, जो इनेलो के इतिहास में कम ही देखा गया।

जजपा की जुलाना रैली में:

  • अजय चौटाला ही सबसे बड़ा चेहरा रहे।

  • पूर्व मंत्री रणजीत चौटाला को निमंत्रण दिया गया, लेकिन वे नहीं पहुंचे।

दिग्विजय चौटाला द्वारा किए गए “बड़ा धमाका” वाले दावे भी जमीन पर नहीं दिखे।


दोनों रैलियों की समानताएं — एक जैसा सेटअप

दिलचस्प बात यह रही कि दोनों पार्टियों ने अपनी रैलियों का सेटअप लगभग एक जैसा रखा।

1. दोहरा मंच (Double Stage)

इनेलो और जजपा दोनों ने डबल स्टेज बनाया—
ऊपरी मंच पर मुख्य नेता और VIP
नीचे वाले मंच पर संगठन पदाधिकारी बैठे।

2. LED स्क्रीन और बड़ा पंडाल

कार्यकर्ताओं तक भाषण स्पष्ट पहुंचे, इसके लिए दोनों कार्यक्रमों में बड़ी LED स्क्रीन लगाई गईं।

3. महिलाओं के लिए अलग व्यवस्था

दोनों रैलियों में महिलाओं के लिए अलग सेक्शन बनाया गया।
महिलाएं हरी चुनरी पहनकर दोनों रैलियों में पहुंचीं।

जुलाना में पानी को लेकर अव्यवस्था दिखी, जबकि रोहतक में इंतज़ाम बेहतर बताए गए।

4. VIP और आम लोगों की पार्किंग अलग

रोहतक की तरह ही जजपा की रैली में VIP पार्किंग मंच के करीब रही।
हालांकि, जजपा में पार्किंग प्रबंधन में दिक्कतें नजर आईं।

5. देवीलाल और ओपी चौटाला के बड़े फोटो

दोनों पार्टियों ने खुद को ‘देवीलाल की असली विरासत’ बताने की कोशिश की, इसलिए फोटो और होर्डिंग्स हर जगह दिखे।


भीड़ किसकी ज़्यादा? दोनों के दावे, पर एक्सपर्ट्स कहते हैं…

इनेलो की रोहतक रैली में कुर्सियां नहीं लगाई गई थीं, सिर्फ गद्दे बिछाए गए थे।
जजपा की रैली में कुर्सियां लगाई गईं, और खाली कुर्सियां न दिखें इसलिए हल्के भूरे रंग की कुर्सियाँ रखी गईं।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक —
बिना कुर्सियों वाली रैलियों में आमतौर पर भीड़ ज्यादा दिखती है, इसलिए रोहतक रैली में भीड़ का आकलन अलग नजर आता है।


जुलाना रैली में दुष्यंत के लिए ‘भावी CM’ के नारे

जुलाना की रैली में जब दुष्यंत चौटाला मंच पर पहुंचे, तो भीड़ में उनके समर्थन में “भावी मुख्यमंत्री” के नारे जोरदार तरीके से लगे।
यह साफ संकेत देता है कि जजपा अपनी खोई जमीन दोबारा पाने के लिए आक्रामक मोड में आ चुकी है।

10 एकड़ में लगे विशाल पंडाल में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे, हालांकि जजपा के आरोपियों और विरोधियों में रैली की भीड़ को लेकर मतभेद देखने को मिले।

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