जब रिश्ते टूटते हैं तो सिर्फ लोग नहीं, जिंदगियां भी बिखर जाती हैं – सिरसा की मनजीत कौर की कहानी

जब रिश्ते टूटते हैं तो सिर्फ लोग नहीं, जिंदगियां भी बिखर जाती हैं – सिरसा की मनजीत कौर की कहानी

हरियाणा के सिरसा में ओटू हेड का शांत पानी उस दिन उफन रहा था — नहीं लहरों से, बल्कि एक औरत के दर्द से।
मनजीत कौर, एक आंगनवाड़ी वर्कर, अपने हाथों में कुल्हाड़ी लिए वहां पहुंची थी। लोग हैरान थे, पुलिस परेशान, और मनजीत बस कह रही थी — अब मैं जीना नहीं चाहती।”

वो दृश्य किसी फिल्म का नहीं था, बल्कि हमारे समाज की एक कड़वी सच्चाई का आइना था — जब प्यार अविश्वास में बदल जाए, तो इंसान खुद से भी हार जाता है।

 15 साल की शादी, लेकिन अब भरोसे की कब्र

मनजीत कौर की शादी करीब 15 साल पहले मंगा सिंह बराड़ से हुई थी। एक बेटा भी है, जिसकी उम्र अब 13 साल है।
पहले सब कुछ सामान्य था, लेकिन वक्त के साथ शक ने घर कर लिया।
एक-दूसरे पर चरित्र के आरोप लगे, और फिर पंचायत के फैसले ने दोनों को अलग कर दिया।
तलाक के बाद भी कहानियां खत्म नहीं हुईं, बल्कि और पेचीदा होती गईं।

 एक-दूसरे पर आरोपों का दौर

मनजीत का कहना है कि उसका पति एक महिला पुलिसकर्मी के साथ रह रहा है — और उसी के कारण उसका घर टूटा।
वहीं पति मंगा सिंह का कहना है कि मनजीत का एक युवक से रिश्ता है, और उसने उसी के साथ मिलकर उस पर हमला भी करवाया।

इन सबके बीच, पुलिस, समाज, और रिश्तेदार — सब केवल तमाशबीन बन गए।
कभी पति को झूठा कहा गया, कभी पत्नी को बदनाम किया गया।
सवाल बस इतना था — कौन सही है?”
लेकिन शायद इससे बड़ा सवाल था — कितना कुछ खो चुका है?”

 ओटू हेड पर ‘ड्रामा’ या ‘पुकार’?

जिसे लोग ‘ड्रामा’ कह रहे हैं, शायद वो एक महिला की आखिरी पुकार थी।
एक मां, जो अपने बेटे का चेहरा देखकर भी अब मुस्कुरा नहीं पा रही थी।
एक पत्नी, जिसे अपने ही रिश्ते की राख में अपने अस्तित्व की तलाश थी।
मनजीत कौर ने सुसाइड की धमकी दी, लेकिन शायद वो मरना नहीं चाहती थी —
वो बस चाहती थी कि कोई उसे समझे।

 SHO का बयान और समाज का सवाल

पुलिस कहती है — “दोनों एक-दूसरे पर शक करते हैं।”
मामला अब जांच में है। लेकिन सवाल ये है कि
क्या हर टूटते रिश्ते की जांच पुलिस ही करेगी?
क्यों हमारे समाज में मानसिक तनाव, भरोसे की कमी और संवाद का अभाव इतना बढ़ गया है कि
अब लोग चुपचाप मरना आसान समझने लगे हैं?

 एक सबक – रिश्ते विश्वास से चलते हैं, शक से नहीं

मनजीत और मंगा की कहानी सिरसा की एक घटना नहीं है —
ये उन हजारों घरों की कहानी है, जहाँ प्यार की जगह शक ने ले ली,
संवाद की जगह आरोपों ने, और स्नेह की जगह अहंकार ने।

हम सबके आसपास कई “मनजीत कौर” हैं — जो मुस्कुराती हैं, लेकिन भीतर से टूटी हुई हैं।
जरूरत है उन्हें सुनने की, समझने की, और समाज को थोड़ा मानवीय बनाने की।

 

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