बिहार चुनाव 2025: महिलाओं पर कांग्रेस का दांव, प्रियंका गांधी संभालेंगी मोर्चा — महागठबंधन को ‘लेडी वोटर्स’ से बड़ी उम्मीद

बिहार चुनाव 2025: महिलाओं पर कांग्रेस का दांव, प्रियंका गांधी संभालेंगी मोर्चा — महागठबंधन को ‘लेडी वोटर्स’ से बड़ी उम्मीद

सुनील राज, पटना।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सियासी जंग अब महिलाओं के इर्द-गिर्द घूमने लगी है। महागठबंधन ने साफ़ रणनीति बना ली है — अगर महिला वोटर साथ आ गईं, तो सत्ता की राह आसान होगी। इसी फॉर्मूले पर कांग्रेस ने अपना सबसे बड़ा दांव लगाया है — प्रियंका गांधी वाड्रा

प्रियंका गांधी होंगी महागठबंधन का चेहरा

कांग्रेस नेतृत्व ने प्रियंका गांधी को विशेष रूप से महिला वोटरों को साधने की ज़िम्मेदारी दी है। अब तक उनके दो बिहार दौरे हो चुके हैं — पहले राहुल गांधी की “वोटर अधिकार यात्रा” में और फिर 26 सितंबर को, जब उन्होंने पटना में “महिला संवाद” कार्यक्रम और मोतिहारी की रैली को संबोधित किया था।

अब वे 3 नवंबर से दोबारा चुनावी मैदान में उतरने जा रही हैं, और महागठबंधन को उम्मीद है कि उनके माध्यम से नीतीश कुमार के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाई जा सकेगी।

क्यों है महिला वोट इतना अहम?

बिहार की राजनीति में महिला मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
पिछले चुनावों में शराबबंदी, जीविका समूहों और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की वजह से महिलाओं का झुकाव जेडीयू (JDU) की ओर रहा है। लेकिन कांग्रेस का मानना है कि अब हालात बदले हैं — महंगाई, बेरोज़गारी, शिक्षा और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर नाराज़गी बढ़ी है।

कांग्रेस को भरोसा है कि प्रियंका गांधी अपनी भावनात्मक अपील और सशक्तिकरण के संदेश के ज़रिये इस तबके को अपने साथ जोड़ सकती हैं।

“लड़की हूं, लड़ सकती हूं” की गूंज फिर तेज़ होगी

कांग्रेस नेताओं — राष्ट्रीय मीडिया समन्वयक अभय दुबे और पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष कौकब कादरी — का कहना है कि प्रियंका गांधी एक “संवेदनशील, दृढ़ और महिला सशक्तिकरण की प्रतीक” छवि रखती हैं।
उनका “लड़की हूं, लड़ सकती हूं” अभियान पहले ही महिला मतदाताओं के बीच मजबूत पहचान बना चुका है, जिसे अब बिहार में फिर से फोकस किया जा रहा है।

रैलियों का शेड्यूल तय

प्रियंका गांधी का 3 से 8 नवंबर तक बिहार दौरा तय है।
वे 3 नवंबर को लखीसराय और रोसड़ा में रैलियाँ करेंगी, इसके बाद गोविंदगंज, चनपटिया, कदवा और कस्बा में भी उनके कार्यक्रम होंगे।

कांग्रेस और महागठबंधन को उम्मीद है कि प्रियंका की एंट्री से चुनावी हवा बदलेगी।
वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम एनडीए के लिए नई चुनौती बन सकता है, खासकर तब जब महिला वोटर इस बार निर्णायक भूमिका में हैं।

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