मेरठ में 100 साल पुरानी दुकानों पर अवैध कॉम्प्लेक्स का निर्माण, 6 नवंबर को हाईकोर्ट में सुनवाई
मेरठ।
मेरठ के बेगमपुल और सराफा बाजार इलाके में 100 साल पुरानी दुकानों को तोड़कर अवैध रूप से बनाए गए व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में 6 नवंबर को सुनवाई होगी। यह मामला चीफ जस्टिस की बेंच में सूचीबद्ध है।
आग लगने पर जान-माल के नुकसान की आशंका
याचिकाकर्ता मनोज चौधरी ने अपनी जनहित याचिका में कहा है कि इन ऐतिहासिक दुकानों को गिराकर बहुमंजिला व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स खड़े कर दिए गए हैं। इन इमारतों में बड़ी संख्या में श्रमिक काम करते हैं और दुकानों में ज्वलनशील उत्पाद भरे रहते हैं।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इन तंग गलियों में आग लगने जैसी घटना होती है तो फायर ब्रिगेड वाहनों का पहुंचना मुश्किल होगा, जिससे भारी जनहानि और संपत्ति नुकसान की आशंका है।
एमडीए और प्रशासन पर कार्रवाई न करने का आरोप
याचिकाकर्ता ने मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए), जिला प्रशासन और उत्तर प्रदेश शासन को प्रतिवादी बनाया है। उनका आरोप है कि तमाम शिकायतों के बावजूद अवैध निर्माणों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
गुरुवार को नहीं हो सकी सुनवाई
इस मामले की सुनवाई गुरुवार को निर्धारित थी, लेकिन केस क्रम संख्या 45 पर होने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। अब यह 6 नवंबर को सूचीबद्ध की गई है।
पृष्ठभूमि
बेगमपुल और सराफा बाजार मेरठ के सबसे पुराने वाणिज्यिक क्षेत्र हैं, जहां दशकों पुरानी छोटी दुकानों को हटाकर बिना अनुमति बहुमंजिला इमारतें बनाई जा रही हैं। शहर के व्यापारी वर्ग का एक हिस्सा इन निर्माणों का समर्थन करता है, जबकि स्थानीय निवासी और पुराने दुकानदार सुरक्षा और वैधता को लेकर विरोध जता रहे हैं।
