कुटुंबा की जंग: कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम के लिए प्रतिष्ठा का सवाल, ललन राम दे रहे कड़ी टक्कर
परिचय: साख बचाने की चुनौती
बिहार विधानसभा चुनावों में औरंगाबाद जिले की कुटुंबा सीट पर इस बार कांग्रेस की प्रतिष्ठा दांव पर है।
यह सीट इसलिए भी खास है क्योंकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम यहां से मैदान में हैं।
यही वह सीट है जहां राहुल गांधी की ‘वोट अधिकार यात्रा’ के दौरान कांग्रेस ने बड़ी उम्मीदें लगाई थीं।
लेकिन इस बार हालात कुछ अलग हैं।
गांव-गांव में विरोध के स्वर उठ रहे हैं और मतदाता खुले तौर पर बदलाव की बात कर रहे हैं।
सीट का गणित और जातीय समीकरण
कुटुंबा विधानसभा, औरंगाबाद लोकसभा की छह सीटों में से एक है।
यह सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है।
यहां SC समुदाय के लगभग 29.2%, मुस्लिम मतदाता 7.8%, और शेष पिछड़े वर्गों की बड़ी संख्या है।
यह पूरी तरह से ग्रामीण इलाका है — जहां अब भी सड़क, सिंचाई, रोजगार और शिक्षा जैसे मुद्दे हावी हैं।
राजेश राम 2015 और 2020 दोनों चुनाव जीत चुके हैं।
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2015 में उन्होंने 10,098 वोटों से जीत दर्ज की।
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2020 में यह अंतर बढ़कर 16,653 तक पहुंच गया।
अब उनके सामने NDA से HAM प्रत्याशी ललन राम भुइयां हैं, जिन्होंने पिछली बार निर्दलीय लड़कर 20 हजार वोट हासिल किए थे।
मतदाताओं की नाराजगी: “विधायक अब जनता से दूर हैं”
अम्बा गांव के रवि कुमार पाल (33) कहते हैं —
“मैं पहले महागठबंधन को वोट देता था, लेकिन राजेश राम अब लोगों से मिलते ही नहीं। इसलिए उन्हें हटाना जरूरी है।”
पिछले 15 दिनों में चार गांवों (पेचकस, रिसियप, दुलारे, नेवड़ा) में राजेश राम का विरोध हो चुका है।
लोगों की शिकायत है कि विधायक बनने के बाद जनता से संपर्क खत्म हो गया।
ग्रामीणों की प्राथमिकताएं: सड़क, रोजगार और शिक्षा
कुटुंबा के धनंजय प्रसाद गुप्ता (45) कहते हैं —
“सड़कें टूटी हैं, अस्पताल नहीं हैं। जीविका योजना का लाभ सबको नहीं मिलता।”
रवि कुमार सिंह, जो टाइल्स की दुकान चलाते हैं, बताते हैं कि
“हर वक्त जाम रहता है, बच्चे सरकारी स्कूल छोड़ कोचिंग जा रहे हैं। विधायक से कोई उम्मीद नहीं।”
महिलाओं और मुस्लिम वोटरों का रुख
महिलाओं में सूरजवानी देवी (60) जैसी मतदाता NDA को समर्थन देती दिखती हैं।
उनका कहना है कि
“मोदी जी ठीक हैं। रोजगार और स्कूल की व्यवस्था सही चल रही है।”
वहीं, नेवड़ा गांव की मुस्लिम महिला रुकैया खातून (55) कहती हैं —
“समस्याएं हैं, लेकिन ठीक हो जाएंगी। फिर भी वोट राजेश राम को ही देंगे।”
यह बयान दर्शाता है कि RJD-कांग्रेस गठबंधन को अब भी ‘पारंपरिक वोट बैंक’ का सहारा मिल सकता है।
कैंडिडेट्स की रणनीति और दावे
राजेश राम (कांग्रेस):
“वोट विकास पर होगा, जाति पर नहीं। महागठबंधन सरकार बनना तय है।”
“जगह-जगह विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है।”
ललन राम भुइयां (HAM, NDA):
“जन बल से धन बल को हराएंगे। पेंशन बढ़ी, आवास योजना सफल रही।
अब सड़क और नल की समस्या भी सुलझेगी।”
श्यामबली (जन सुराज):
“राजेश राम जनता से कट चुके हैं। लोग विकल्प तलाश रहे हैं।”
ग्राउंड एक्सपर्ट्स की राय
ओम प्रकाश शर्मा, जो 22 साल से कुटुंबा में रिपोर्टिंग कर रहे हैं, बताते हैं —
“यहां सिंचाई सबसे बड़ी समस्या है।
उत्तर कोयल नहर प्रोजेक्ट पूरा हो जाए तो खेती में क्रांति आ सकती है।”
विश्वनाथ पांडे, वरिष्ठ पत्रकार, मानते हैं —
“राजेश राम और ललन भुइयां के बीच कांटे की टक्कर है।
दोनों अपने व्यक्तित्व और पुराने नेटवर्क पर टिके हैं।”
