Google की पैरेंट कंपनी Alphabet ने पहली बार पार किया ₹9 लाख करोड़ का आंकड़ा — सुंदर पिचाई बोले, “यह माइलस्टोन क्वार्टर है”
दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में शुमार Alphabet Inc. (Google की पेरेंट कंपनी) ने इतिहास रच दिया है।
सितंबर 2025 तिमाही में कंपनी ने पहली बार 100 बिलियन डॉलर (करीब ₹9.06 लाख करोड़) का रेवेन्यू हासिल किया है।
CEO सुंदर पिचाई ने इसे “माइलस्टोन क्वार्टर” बताया है और कहा कि “सर्च, यूट्यूब और क्लाउड” में डबल डिजिट ग्रोथ ने यह रिकॉर्ड संभव किया।
पांच साल पहले गूगल का तिमाही रेवेन्यू 50 बिलियन डॉलर था — यानी कंपनी ने सिर्फ आधे दशक में अपनी कमाई दोगुनी कर ली है।
तिमाही नतीजों की बड़ी बातें
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7.5 करोड़ डेली एक्टिव यूजर्स गूगल के AI फीचर्स का इस्तेमाल कर रहे हैं — सर्च क्वेरीज़ की संख्या इस तिमाही में दोगुनी हुई।
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कस्टमर ग्रोथ साल-दर-साल 34% रही, और मौजूदा ग्राहकों में से 70% से ज्यादा अब Google AI प्रोडक्ट्स (जैसे Gemini) का उपयोग कर रहे हैं।
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Google Cloud का रेवेन्यू 34% बढ़कर $15.16 अरब (₹1.3 लाख करोड़) हो गया।
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13 AI प्रोडक्ट लाइनों (जैसे Gemini Models) ने $1 बिलियन+ की वार्षिक कमाई का रन रेट छू लिया।
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YouTube लगातार दूसरे साल अमेरिका में वॉच टाइम में नंबर 1 बना रहा।
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YouTube Shorts अब लंबे वीडियोज़ से ज्यादा कमाई कर रहे हैं — ऐड रेवेन्यू 15% बढ़कर $10.26 अरब (₹91,023 करोड़) पहुंचा।
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कंपनी दिसंबर 2025 तक Gemini 3, अगली पीढ़ी का AI मॉडल लॉन्च करने की तैयारी में है।
Google: एक सर्च इंजन से दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी टेक कंपनी तक
आज “गूगल कर लो” सुनना आम बात है। लेकिन 1998 से पहले सर्च करना इतना आसान नहीं था।
यहीं से शुरू होती है लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन की कहानी — दो जीनियस जिनका मिशन था, “दुनिया की जानकारी को व्यवस्थित करना।”
Chapter 1 – मुलाकात: स्टैनफोर्ड से शुरू हुई दोस्ती
1995 में मिशिगन का लड़का लैरी पेज स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर इंजीनियरिंग पढ़ने आया। वहीं मिला सर्गेई ब्रिन से, जो पहले से वहां रिसर्चर थे।
पहली मुलाकात में दोनों के बीच बहस हुई — लेकिन धीरे-धीरे दोनों बेहतरीन दोस्त और आइडिया पार्टनर बन गए।
Chapter 2 – जीनियस आइडिया: “Backrub” से “Google” तक
लैरी अपनी PhD के लिए प्रोजेक्ट ढूंढ रहे थे। उन्होंने ऐसा सर्च इंजन बनाने की सोची जो सिर्फ कीवर्ड्स नहीं, बल्कि वेबपेज के लिंक के आधार पर रैंकिंग तय करे।
उन्होंने सर्गेई के साथ मिलकर “PageRank Algorithm” बनाया और नाम रखा Backrub।
बाद में इसे “Googol” (1 के बाद 100 ज़ीरो) से प्रेरित होकर “Google” नाम दिया गया — हालांकि यह स्पेलिंग गलती से “Google” हो गया!
Chapter 3 – फंडिंग: गैराज से शुरू हुआ सफर
1998 में Google एक गैराज से चल रहा था।
जब फंडिंग मांगने गए तो कई निवेशकों ने कहा — “पहले से पांच सर्च इंजन हैं, छठा क्यों?”
लेकिन Andy Bechtolsheim (Sun Microsystems) ने 1 लाख डॉलर का चेक दे दिया।
इसके बाद राम श्रीराम और जेफ बेजोस (Amazon) ने भी इन्वेस्ट किया।
पहला कर्मचारी था Craig Silverstein, जिसे 12 इंटरव्यू के बाद चुना गया।
Chapter 4 – ऑफर: जब Yahoo ने खरीदना चाहा
2002 में Yahoo ने Google को $3 बिलियन में खरीदने का ऑफर दिया।
लैरी और सर्गेई ने जवाब दिया – “हम $5 बिलियन से कम में नहीं बेचेंगे।”
डील नहीं बनी — और यह Google के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण ‘ना’ साबित हुआ।
दो साल बाद Google $27 बिलियन के IPO के साथ पब्लिक हुआ, जबकि Yahoo पीछे छूट गया।
Chapter 5 – प्रोडक्ट्स: जिन्होंने दुनिया बदल दी
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2004: जीमेल लॉन्च हुआ — 1GB स्टोरेज, जब बाकी ईमेल सिर्फ 2MB देते थे।
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2005: गूगल मैप्स लॉन्च — आज दुनिया का सबसे लोकप्रिय नेविगेशन टूल।
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2005: $50 मिलियन में Android Inc. खरीदी — आज दुनिया के 85% स्मार्टफोन्स एंड्रॉयड पर हैं।
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2006: $1.65 बिलियन में YouTube का अधिग्रहण — जिसने वीडियो रेवोल्यूशन ला दिया।
Chapter 6 – नया दौर: Alphabet का जन्म और पिचाई का युग
2012 में लैरी पेज की वोकल कॉर्ड बीमारी के बाद 2015 में बड़ा फैसला लिया गया —
Alphabet Inc. की स्थापना हुई, ताकि गूगल सर्च इंजन से आगे बढ़कर हेल्थ, एनर्जी, और सेल्फ-ड्राइविंग टेक्नोलॉजी में प्रवेश कर सके।
लैरी पेज बने Alphabet के CEO, सर्गेई ब्रिन बने President, और सुंदर पिचाई को Google का CEO बनाया गया।
2019 में दोनों फाउंडर्स ने पूरी तरह पीछे हटकर सुंदर पिचाई को Alphabet का भी CEO बना दिया।
आज Alphabet की मार्केट वैल्यू $3 ट्रिलियन से ज्यादा है और यह AI, क्लाउड और क्वांटम कंप्यूटिंग में अग्रणी है।
