ED की बड़ी कार्रवाई: अनिल अंबानी की 3,084 करोड़ की 40 से अधिक प्रॉपर्टीज अटैच, मुंबई से चेन्नई तक फैली संपत्तियां
नई दिल्ली।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उद्योगपति अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप से जुड़ी 40 से ज्यादा संपत्तियों को अटैच कर लिया है।
इन संपत्तियों की कुल कीमत करीब ₹3,084 करोड़ बताई जा रही है।
सबसे चर्चित संपत्तियों में मुंबई के पाली हिल स्थित अनिल अंबानी का आलीशान रेसिडेंस भी शामिल है।
31 अक्टूबर को जारी हुआ अटैचमेंट ऑर्डर
ED ने यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 की धारा 5(1) के तहत की है।
यह आदेश 31 अक्टूबर 2025 को जारी किया गया था।
ED का कहना है कि यह कदम पब्लिक मनी की रिकवरी और फंड डायवर्जन की जांच के तहत जरूरी है।
PMLA कानून 2002 में ब्लैक मनी और अवैध संपत्तियों पर रोक लगाने के लिए बनाया गया था, जिसमें प्रॉपर्टी अटैचमेंट से लेकर कोर्ट ट्रायल तक की प्रक्रिया शामिल है।
मुंबई से चेन्नई तक फैली 3,084 करोड़ की संपत्तियां
अटैच की गई प्रॉपर्टीज देश के कई प्रमुख शहरों में फैली हैं —
दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, मुंबई, पुणे, ठाणे, हैदराबाद, चेन्नई, कांचीपुरम और ईस्ट गोदावरी।
इनमें रेसिडेंशियल यूनिट्स, ऑफिस स्पेस और लैंड पार्सल शामिल हैं।
सबसे हाई-प्रोफाइल प्रॉपर्टी है पाली हिल स्थित अनिल अंबानी का घर, जिसकी कीमत करोड़ों में बताई जा रही है।
ED फिलहाल क्राइम प्रोसीड्स (अवैध कमाई) को ट्रेस करने पर फोकस कर रही है ताकि और संपत्तियों को भी अटैच किया जा सके।
मनी लॉन्ड्रिंग केस: यस बैंक लोन घोटाले से जुड़ा मामला
यह मामला 2017 से 2019 के बीच यस बैंक द्वारा दिए गए लोन से जुड़ा है।
ED की जांच में सामने आया कि रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कॉमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) को दिए गए हजारों करोड़ रुपए के लोन का गलत इस्तेमाल किया गया।
मुख्य वित्तीय आंकड़े:
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यस बैंक ने RHFL को ₹2,965 करोड़ का निवेश किया।
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RCFL में ₹2,045 करोड़ का निवेश हुआ।
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दिसंबर 2019 तक ये दोनों खाते NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) बन गए।
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यस बैंक को कुल मिलाकर ₹2,700 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ।
ED के मुताबिक, इन फंड्स को रिलायंस ग्रुप की अन्य कंपनियों और फर्जी इकाइयों में डायवर्ट कर दिया गया।
ED की जांच में सामने आईं गड़बड़ियां
ED ने अपनी रिपोर्ट में इसे “इंटेंशनल कंट्रोल फेल्योर” (जानबूझकर की गई लापरवाही) बताया है।
जांच में सामने आई कुछ प्रमुख गड़बड़ियां 👇
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कई लोन आवेदन, अप्रूवल और डिस्बर्समेंट एक ही दिन में पूरे हुए।
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फील्ड वेरिफिकेशन और डॉक्यूमेंटेशन की प्रक्रिया पूरी तरह से नजरअंदाज की गई।
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कई फाइलों में ब्लैंक या डेटलेस दस्तावेज पाए गए।
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कुछ कंपनियां समान पते और डायरेक्टर्स के साथ बनाई गई थीं।
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पुराने लोन चुकाने के लिए नए लोन जारी किए गए (लोन एवरग्रीनिंग)।
ED का दावा है कि यह सब एक “सुनियोजित साजिश” थी, जिसका उद्देश्य बैंक और निवेशकों के पैसे का दुरुपयोग करना था।
CBI की जांच और अन्य एजेंसियों की भूमिका
ED की कार्रवाई से पहले CBI ने भी इस मामले में दो FIR दर्ज की थीं, जो यस बैंक द्वारा RHFL और RCFL को दिए गए दो लोन से जुड़ी थीं।
इन मामलों में यस बैंक के पूर्व CEO राणा कपूर का नाम भी शामिल है।
CBI की जांच के बाद नेशनल हाउसिंग बैंक (NHB), SEBI, नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (NFRA) और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसी संस्थाओं ने भी ED के साथ जानकारी साझा की, जिससे जांच और मजबूत हुई।
3 सवाल-जवाब में समझिए पूरा मामला
सवाल 1: ED ने अनिल अंबानी के खिलाफ कार्रवाई क्यों की?
जवाब:
यस बैंक द्वारा दिए गए लोन को रिलायंस ग्रुप की अन्य कंपनियों में डायवर्ट किया गया था। फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल हुआ और बैंक अधिकारियों की मिलीभगत के संकेत मिले।
सवाल 2: जांच में क्या-क्या सामने आया?
जवाब:
ED ने इसे “सोचा-समझा फंड डायवर्जन प्लान” बताया है। इसमें फर्जी कंपनियां, एक जैसे डायरेक्टर, अधूरे दस्तावेज और लोन प्रक्रिया में कई गड़बड़ियां मिलीं।
सवाल 3: CBI की भूमिका क्या है?
जवाब:
CBI ने लोन से जुड़ी FIR दर्ज कर जांच शुरू की थी। बाद में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं की जांच ED ने अपने हाथ में ली। अन्य वित्तीय एजेंसियां भी अब इसमें सहयोग कर रही हैं।
