दिल्ली ब्लास्ट की त्रासदी: ई-रिक्शा चालक मोहसिन की मौत से टूटा परिवार, मेरठ और दिल्ली के बीच 6 घंटे तक चला अंतिम संस्कार का विवाद

दिल्ली ब्लास्ट की त्रासदी: ई-रिक्शा चालक मोहसिन की मौत से टूटा परिवार, मेरठ और दिल्ली के बीच 6 घंटे तक चला अंतिम संस्कार का विवाद

दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास सोमवार शाम हुए भयानक ब्लास्ट ने कई परिवारों की खुशियां उजाड़ दीं। इस विस्फोट में मेरठ के मोहसिन (32) की मौत हो गई — एक ऐसा आम आदमी, जो अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए रोज मेहनत करता था।

मोहसिन का शव जब मंगलवार सुबह मेरठ पहुंचा, तो पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई। लेकिन इस दर्द के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया — मोहसिन का अंतिम संस्कार कहां होगा, दिल्ली या मेरठ?


 रोजी-रोटी की तलाश में दिल्ली गया था मोहसिन

मोहसिन मूल रूप से मेरठ के न्यू इस्लामनगर, गली नंबर-28 का रहने वाला था। करीब दो साल पहले वह अपनी पत्नी सुल्ताना, 10 साल की बेटी हिफजा और 8 साल के बेटे आहद के साथ दिल्ली के जामा मस्जिद स्थित पत्ता मोहल्ले में रहने चला गया था।
दिल्ली जाकर उसने ई-रिक्शा चलाना शुरू किया था ताकि अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा और जीवन दे सके।


 ब्लास्ट की चपेट में आया मेहनती रिक्शाचालक

सोमवार शाम मोहसिन रोज की तरह सवारियां लेकर लाल किला की ओर गया था। लेकिन उसी वक्त वहां भयावह विस्फोट हो गया। मोहसिन की ई-रिक्शा भी उस धमाके की चपेट में आ गई। कुछ ही पलों में उसकी मौत हो गई।

रात भर परिजन उसे फोन करते रहे, लेकिन जवाब नहीं मिला। मंगलवार सुबह डीएनए जांच के बाद पुष्टि हुई कि मोहसिन अब इस दुनिया में नहीं रहा।


 मेरठ और दिल्ली के बीच अंतिम संस्कार पर विवाद

मंगलवार को जब शव मेरठ लाया गया, तो मोहसिन की पत्नी सुल्ताना भी वहां पहुंच गईं। उन्होंने मेरठ में दफनाने से इनकार कर दिया और कहा कि शव दिल्ली में दफनाया जाएगा, क्योंकि वही अब उनका घर है।

इसके बाद सुल्ताना और मोहसिन की मां संजीदा तथा देवर नदीम के बीच तीखा झगड़ा हो गया।
भावनाओं से भरे इस माहौल में सास ने बहू के पैर पकड़ लिए कि बेटे का शव मेरठ में ही दफनाया जाए। लेकिन सुल्ताना ने भी सास के पैर पकड़ते हुए कहा —

“अम्मी, मोहसिन अब दिल्ली का था, मैं उसे वहीं दफनाऊंगी।”

करीब 6 घंटे तक चला यह विवाद, आखिरकार सबकी सहमति से फैसला हुआ कि मोहसिन का अंतिम संस्कार दिल्ली में ही किया जाएगा।


मां की पुकार: “मैंने दिल्ली जाने से मना किया था”

मोहसिन की मां संजीदा का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने कहा —

“मैंने अपने बेटे को दिल्ली जाने से मना किया था। लेकिन उसकी बीवी दिल्ली की थी, इसलिए वह नहीं माना।
वह बच्चों की पढ़ाई के लिए गया था, कमाने गया था, मरने नहीं।”

संजीदा के अनुसार, सोमवार शाम मोहसिन की पत्नी सुल्ताना ने देवर नदीम को फोन किया कि “बम ब्लास्ट हुआ है, मोहसिन गायब है।”
रातभर तलाश करने के बाद नदीम को अस्पताल में मोहसिन का शव मिला।


 “100 बार कॉल किया, लेकिन फोन नहीं उठा”

पत्नी सुल्ताना ने बताया —

“मोहसिन दोपहर 1 बजे घर से निकले थे। शाम 6 बजे बोले कि कश्मीरी गेट पर हैं, जाम में फंसे हैं।
उसके बाद फोन नहीं उठा। मैंने सौ बार कॉल किया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
सुबह पता चला कि वो अब नहीं रहे।”

सुल्ताना ने आरोप लगाया कि बिना इजाजत के उनके ससुराल वाले शव मेरठ ले आए। इसलिए उन्होंने शव वापस दिल्ली ले जाने का फैसला किया।


 पिता की व्यथा

मोहसिन के पिता रफीक ने बताया कि उनका बेटा 9 भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर था। रोज 500-600 रुपए कमाकर घर चलाता था।

“वो अपने बच्चों को पढ़ा-लिखाकर बड़ा आदमी बनाना चाहता था।
पर उसे क्या पता था कि मौत उसे दिल्ली तक बुला ले जाएगी।”


 “गरीब की क्या गलती थी?”

मोहल्ले के लोगों का कहना है —

“ई-रिक्शा चलाने वाले उस गरीब की क्या गलती थी?
इंसानियत के दुश्मनों ने उसके परिवार की दुनिया उजाड़ दी।”

अब मोहसिन की मौत के बाद उसके दो छोटे बच्चे बिन पिता के भविष्य की ओर देख रहे हैं। मोहसिन के रिश्तेदारों का कहना है कि सरकार को इस परिवार की आर्थिक मदद और बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी उठानी चाहिए।

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