कोलकाता में बंकिम चंद्र का जर्जर घर: लाइब्रेरी बंद, रखरखाव पर राजनीति तेज — ग्राउंड रिपोर्ट

कोलकाता में बंकिम चंद्र का जर्जर घर: लाइब्रेरी बंद, रखरखाव पर राजनीति तेज — ग्राउंड रिपोर्ट

राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के मौके पर जब देशभर में कार्यक्रम हुए, उसी दौरान कोलकाता में बंकिम चंद्र चटोपाध्याय के मकान की बदहाल हालत को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया। पाँचवीं पीढ़ी से आने वाले सजल चट्टोपाध्याय ने राज्य सरकार पर उपेक्षा करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि “धरोहर घोषित करने के बाद भी सरकार ने इस मकान को उसके हाल पर छोड़ दिया।”

दैनिक भास्कर की टीम ने 5-प्रताप चटर्जी स्ट्रीट, कोलकाता जाकर इस मकान और लाईब्रेरी की ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की। पढ़िए पूरा मामला—


धरोहर तो बनाया, लेकिन रखरखाव और सफाई भूली सरकार

बंकिम चंद्र के जिस मकान को पश्चिम बंगाल की लेफ्ट सरकार ने अधिग्रहित कर लाइब्रेरी बनाया था, उसकी हालत आज बेहद खराब है।
2006 में इसे ‘साहित्य सम्राट स्मृति लाइब्रेरी’ के रूप में शुरू किया गया था। लेकिन अब:

  • लाइब्रेरी के गेट के बाहर कचरे का ढेर

  • नियमित साफ-सफाई नहीं

  • रविवार को लाइब्रेरी पूरी तरह बंद

  • आसपास के लोग मौके-पे-पर सफाई करते हैं

स्थानीय निवासी धर्मेंद्र यादव बताते हैं, “सोमवार से शनिवार तक कोई आकर लाइब्रेरी खोल देता है, लेकिन अंदर कोई नहीं जाता। सरकारी देखरेख नाम की चीज नहीं है।”


विवाद के बीच राजनीति गरमाई

जब BJP ने ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल पूरे होने पर यहां कार्यक्रम किया, तब नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी को लाइब्रेरी का गेट नहीं खोलने दिया गया।
पास की गली में आज भी BJP के झंडे लगे दिखाई देते हैं।

एक स्थानीय व्यक्ति (नाम न छापने की शर्त पर) का दावा है—
“जिस दिन शुभेंदु अधिकारी आ रहे थे, उससे एक रात पहले सड़क तोड़ दी गई थी। अभी दोबारा बनाई गई है।”


“BJP को चुनाव के वक्त ही बंकिम बाबू याद आते हैं” — लोकल दुकानदार

उसी गली में दुकान चलाने वाले नरेंद्र बारिक बताते हैं—

  • यह मकान 2005 में लेफ्ट सरकार ने रेनोवेट कराया था

  • सांसद मोहम्मद सलीम ने सांसद निधि से खर्च करवाया था

  • उद्घाटन बुद्धदेव भट्टाचार्य ने किया था

  • तब लाइब्रेरी में दो लाइब्रेरियन और विज़िटर्स आते थे

  • विदेशी शोधकर्ता भी यहां आते थे

“अब सब समाप्त हो गया है। नाम की लाइब्रेरी है, कोई आता जाता नहीं।”


बंकिम चंद्र के वंशजों की पीड़ा: “हमसे कोई पूछता भी नहीं”

बंकिम चंद्र के वंशज सजल चट्टोपाध्याय बेहद दुखी हैं। वे बताते हैं—

सरकार से गिला:

  • “आजादी के बाद से बंकिम चंद्र की संपत्ति देश की धरोहर बनी, लेकिन उनके वंशजों का कोई महत्व नहीं रखा गया।”

  • “ममता बनर्जी ने कभी याद नहीं किया।”

लाइब्रेरी पर आरोप:

  • “लेफ्ट सरकार के समय मरम्मत और लाइब्रेरी दोनों नियमित थे।”

  • “ममता सरकार आने के बाद हालात सबसे ज्यादा बिगड़े।”

  • “जब भी हम गए, लाइब्रेरी ताला लगी ही मिली।”

वे कहते हैं, “अगर आज बंकिम बाबू को लोग भूलते जा रहे हैं, तो इसकी जिम्मेदारी सरकारों की है।”


सजल चट्टोपाध्याय की मांग

  • देश में ‘बंकिम भवन’ बनाए जाएं

  • बंकिम चंद्र के नाम पर एक विश्वविद्यालय बने

  • संसद में वंदे मातरम् गाया जाए


BJP बनाम TMC: आरोप-प्रत्यारोप शुरू

BJP का आरोप

राज्य BJP अध्यक्ष सौमित्र भट्टाचार्य ने कहा—

  • “मकान की हालत दयनीय है।”

  • “बाहर मजदूर सोते हैं, पड़ोसी कपड़े सुखाते हैं।”

  • “TMC बंकिम चंद्र जैसे महान लेखक की उपेक्षा कर रही है।”

  • “शुभेंदु अधिकारी के कार्यक्रम के दिन सड़क तोड़ दी गई थी।”

TMC का जवाब

ऑफ द रिकॉर्ड एक TMC लीडर:
“BJP केवल राजनीति कर रही है… धरोहर की देखरेख हो रही है।”

शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु बोले—
“BJP बंकिम और टैगोर के नाम पर बंगाल को बांटना चाहती है।”


वंदे मातरम् का इतिहास

  • 1870 के दशक में बंकिम चंद्र ने ‘वंदे मातरम्’ लिखा

  • यह उनके उपन्यास आनंदमठ (1882) का हिस्सा है

  • 1950 में इसे राष्ट्रीय गीत का दर्जा मिला

  • 150 वर्ष पूरे होने पर केंद्र सरकार ने स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी किए

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