US अमेरिका में परमाणु तैयारी तेज़: ट्रंप के आदेश के बाद मिनटमैन-3 मिसाइल टेस्ट की उलटी गिनती शुरू

US अमेरिका में परमाणु तैयारी तेज़: ट्रंप के आदेश के बाद मिनटमैन-3 मिसाइल टेस्ट की उलटी गिनती शुरू

वाशिंगटन डी.सी. (04 नवंबर 2025): अमेरिका एक बार फिर परमाणु परीक्षण की दिशा में बढ़ता नजर आ रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान के बाद अमेरिकी सेना ने कैलिफोर्निया के वांडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से मिनटमैन-3 इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) के टेस्ट लॉन्च की तैयारियां शुरू कर दी हैं।

यह परीक्षण 5 या 6 नवंबर 2025 को प्रस्तावित है। मिसाइल बिना परमाणु वारहेड के छोड़ी जाएगी और इसका लक्ष्य मार्शल द्वीपसमूह के क्वाजलीन एटोल स्थित रोनाल्ड रीगन टेस्ट साइट होगी। अमेरिकी वायुसेना का कहना है कि यह रूटीन टेस्ट है, जिसका उद्देश्य मिसाइल सिस्टम की सटीकता और विश्वसनीयता जांचना है।


ट्रंप का आदेश: “33 साल बाद अब समय आ गया है”

30 अक्टूबर 2025 को राष्ट्रपति ट्रंप ने 1992 के बाद पहली बार अमेरिका को “न्यूक्लियर टेस्टिंग प्रोग्राम” फिर से शुरू करने का निर्देश दिया। उनका कहना है कि रूस, चीन और पाकिस्तान जैसे देश अपने हथियारों को लगातार उन्नत कर रहे हैं, और अमेरिका को प्रतिस्पर्धा में पीछे नहीं रहना चाहिए।

हालांकि, ऊर्जा विभाग ने साफ किया है कि फिलहाल यह विस्फोटक परीक्षण नहीं होगा, बल्कि गैर-विस्फोटक (non-explosive) परीक्षण किया जाएगा जो CTBT (Comprehensive Nuclear-Test-Ban Treaty) के दायरे में आता है।


मिनटमैन-3: अमेरिका की रणनीतिक ताकत की रीढ़

मिनटमैन-3 मिसाइल अमेरिका के लैंड-बेस्ड न्यूक्लियर डिटरेंट सिस्टम की मुख्य कड़ी है।

  • रेंज: 13,000 किलोमीटर तक

  • लॉन्च प्लेटफॉर्म: भूमिगत साइलो (ग्लोबल स्ट्राइक कमांड के नियंत्रण में)

  • टारगेट: रोनाल्ड रीगन बैलिस्टिक मिसाइल टेस्ट साइट, क्वाजलीन एटोल

  • मिशन: सिस्टम की सटीकता, रेंज और तत्परता का मूल्यांकन

USAF के अनुसार, यह टेस्ट हर तिमाही किया जाता है ताकि अमेरिका की मिसाइल प्रणाली किसी भी समय जवाबी कार्रवाई करने के लिए तैयार रहे।


विशेषज्ञों की राय: “ताकत या तनाव?”

विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम ट्रंप की नीति “Peace Through Strength” (ताकत से शांति) को दर्शाता है।

  • समर्थक कहते हैं, इससे अमेरिकी सुरक्षा मजबूत होगी और डिटरेंस क्षमता बढ़ेगी।

  • विरोधी चेतावनी देते हैं, यह कदम वैश्विक हथियारों की होड़ को फिर से हवा दे सकता है और अंतरराष्ट्रीय शांति पर असर डाल सकता है।

रूस और चीन पहले ही अमेरिका को चेतावनी दे चुके हैं कि इस तरह की कार्रवाइयां तनाव बढ़ा सकती हैं। वहीं संयुक्त राष्ट्र ने सभी देशों से CTBT के पालन की अपील की है।


ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

अमेरिका ने आखिरी बार विस्फोट वाला परमाणु परीक्षण 1992 में किया था। इसके बाद परीक्षणों पर स्वैच्छिक रोक (moratorium) लागू रही।
वर्तमान में लगभग 400 मिनटमैन-3 मिसाइलें सक्रिय हैं, जो मोंटाना, वायोमिंग और नॉर्थ डकोटा में तैनात हैं। मई 2025 में हुआ पिछला रूटीन टेस्ट सफल रहा था।


दुनिया की नजरें वांडेनबर्ग पर

ट्रंप के निर्देश के बाद यह परीक्षण न केवल अमेरिका के सैन्य कार्यक्रम का हिस्सा है, बल्कि यह दुनिया के लिए एक संदेश भी है — अमेरिका अपनी परमाणु क्षमता को लेकर अब पहले से अधिक गंभीर है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस कदम को संभावित “न्यूक्लियर रेस 2.0” की शुरुआत के रूप में भी देख रहा है।

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